TMC में टूट तय! ममता के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए केवल 8 विधायक, कहां गए बाकी नेता?

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Mamata Banerjee: पश्‍च‍िम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद से ही ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. हर दिन एक नई मुसीबत ममता के सामने आकर उन्हें चुनौती दे रही है. पहले बैठक से विधायकों का गायब होना और अब उनके ही प्रदर्शन में ज्यादातर विधायकों का शामिल न होना कई तरह के सवाल पैदा कर रहा है.

ममता बनर्जी पिछले दिनों टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी पर हुए हमलों को लेकर विरोध कर रही है. वे कोलकाता के रानी रासमणि एवेन्यू में सड़कों पर उतरीं, लेकिन यहां वे तो दिखी लेकिन उनकी पार्टी कहीं से कहीं तक नजर नहीं आई. यही वजह है कि सवाल खड़ा हो रहा है कि क्‍या ममता खुद को पार्टी के भीतर अकेला खड़ी पा रही हैं?

ममता के विधायक सांसदों ने छोड़ा साथ?
मंगलवार को पश्‍च‍िम बंगाल की राजधानी कोलकाता में ममता बनर्जी विरोध प्रदर्शन के लिए उतरी, इसके लिए बाकायदा पहले से तैयारी की गई थी. ऐसा कहा जा रहा था कि उनके साथ इस प्रदर्शन में सभी विधायक भी शामिल हो सकते हैं. हालांकि हकीकत इसके उलट रही. टीएमसी के 8 विधायक और 6 सांसद ही प्रोटेस्ट शामिल हुए. जबकि पार्टी के ज्यादातर नेताओं ने उससे दूरी बना ली. इससे सवाल उठने लगे हैं कि क्‍या ममता के विधायक और सांसदों ने भी उनका साथ छोड़ दिया है?

पार्टी के अंदर सब कुछ ठीक?
ममता के इस धरने में शामिल होने वाले विधायकों में सिर्फ सोभनदेब चट्टोपाध्याय, नान्या बंदोपाध्याय, मदन मित्रा, अशोक देब, असीमा पात्रा, बिमान बनर्जी, फ़िरहाद हकीम और कुणाल घोष शामिल थे. टीएमसी के सांसदों में डोला सेन,कल्याण बनर्जी, डेरेक ओ ब्रायन, समीरुल इस्लाम, मेनका गुरुस्वामी और नदीमुल हक शामिल थे.

इन नेताओं के शामिल होने और न शामिल न होने वाले नेताओं ने कई तरह के सवाल खड़े कर द‍िए हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि क्या अब पार्टी के नेता ही ममता के खिलाफ हो चुके हैं? राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह भी है कि टीएमसी में बहुत जल्‍द बड़ी टूट देखने को मिल सकती है . मतलब यह कि टीएमसी दो धड़ों में बट सकती है.

उद्धव जैसा होगा ममता का हाल?
टीएमसी में यह राजनीतिक संकट तब और गहरा गया जब पार्टी से हाल ही में निकाले गए मुखर नेता रिजू दत्ता ने एक सनसनीखेज दावा कर दिया. रिजू दत्ता ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस अब औपचारिक रूप से दो धड़ों में बंटने की कगार पर खड़ी है. मतलब यह कि महाराष्‍ट्र की तरह ही अब बंगाल में टीएमसी के साथ शिवसेना जैसा हाल हो सकता है और ममता की हालत उद्धव ठाकरे जैसी हो सकती है. बहरहाल देखना होगा कि आगे आने वाले दिनों में क्या होता है.

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