शहडोल। मध्यप्रदेश के शहडोल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे जिला अस्पताल से स्वास्थ्य व्यवस्था को हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां इलाज कराने पहुंचे अनूपपुर जिले के एक मरीज को कथित तौर पर अस्पताल की ओपीडी में बंद कर दिया गया। मरीज घंटों तक कमरे में कैद रहा और बाहर निकलने के लिए मदद की गुहार लगाता रहा। काफी देर बाद जब सुरक्षा गार्ड की नजर उस पर पड़ी, तब कहीं जाकर कमरा खुला और मरीज को बाहर निकाला गया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
अनूपपुर जिले के बिजुरी निवासी मोहम्मद अमजद इलाज कराने के लिए शहडोल जिला अस्पताल पहुंचे थे। वह अस्पताल की ओपीडी के कमरा नंबर 14 में डॉक्टर को दिखाने गए थे। इसी दौरान कथित तौर पर ओपीडी में ताला लगा दिया गया और मरीज अंदर ही बंद रह गया, देखते ही देखते इलाज कराने आया मरीज खुद को एक बंद कमरे में कैद पाया।
बताया जा रहा है कि मरीज ने बाहर निकलने के लिए काफी देर तक आवाज लगाई और मदद की गुहार करता रहा,बंद कमरे में फंसे रहने के दौरान उसकी परेशानी और बढ़ गई। घंटों इंतजार के बाद जब सुरक्षा गार्ड की नजर कमरे में बंद मरीज पर पड़ी, तब ताला खोलकर उसे बाहर निकाला गया। बाहर आने के बाद मरीज ने राहत की सांस ली।
मोबाइल कैमरे में कैद हुई घटना, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
इस घटना को अस्पताल में मौजूद किसी व्यक्ति ने अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया, अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि, मरीज को किस परिस्थिति में और किसकी ओर से कमरे में बंद किया गया। इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
संभाग के सबसे बड़े अस्पताल में ऐसी लापरवाही क्यों
शहडोल संभाग के इस प्रमुख शासकीय अस्पताल में मध्यप्रदेश के अनूपपुर, उमरिया सहित आसपास के जिलों और छत्तीसगढ़ से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में अस्पताल की व्यवस्थाओं और मरीजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। अब सवाल यह है कि आखिर ओपीडी बंद करते समय अंदर मौजूद मरीज पर किसी की नजर क्यों नहीं पड़ी। क्या अस्पताल में कमरों को बंद करने से पहले जांच की कोई व्यवस्था नहीं है।
