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JSSC CGL Paper Leak: प्रिंटिंग एजेंसी के कर्मचारी ने परीक्षा से पहले याद किए सवाल-जवाब! CID जांच में फ्लाइट, कोचिंग और संदिग्ध ट्रांजैक्शन का खुलासा

Woman Express
Last updated: October 8, 2026 3:01 pm
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6 Min Read
JSSC PAPER LEAK
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रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL परीक्षा-2023 में कथित पेपर लीक और फर्जीवाड़े की CID जांच में कई अहम खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच के अनुसार, प्रश्नपत्र की डिजाइनिंग और प्रिंटिंग प्रक्रिया से जुड़े एजेंसी कर्मी समीर कुमार ने परीक्षा से पहले ही प्रश्न और उनके उत्तर याद कर लिए थे। जांच एजेंसी अब उसकी भूमिका, यात्रा और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन को पेपर लीक के पूरे नेटवर्क से जोड़कर पड़ताल कर रही है।

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प्रश्नपत्र तैयार करने वाली एजेंसी में काम करता था समीर
CID की जांच के दायरे में आया समीर कुमार मानेसर स्थित ICN India नामक एजेंसी में कार्यरत था। एजेंसी को JSSC CGL परीक्षा के प्रश्नों की डिजाइनिंग, प्रिंटिंग, जंबलिंग और OMR शीट तैयार करने जैसे बेहद संवेदनशील कार्यों की जिम्मेदारी मिली थी।

जांच के मुताबिक, प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया से सीधे जुड़े होने के कारण समीर के पास परीक्षा से पहले ही प्रश्नों और उत्तरों तक पहुंच थी। आरोप है कि उसने इसी अंदरूनी पहुंच का फायदा उठाकर प्रश्न और उनके उत्तर याद कर लिए।

अंदरूनी पहुंच से सिंडिकेट तक पहुंचा पेपर
CID के अनुसार, समीर की प्रश्नपत्र निर्माण प्रक्रिया तक सीधी पहुंच ने कथित सिंडिकेट को पेपर लीक कराने का रास्ता उपलब्ध कराया। जांच में यह भी सामने आया है कि परीक्षा से पहले समीर ने पूरे प्रश्नपत्र और उनके उत्तर कंठस्थ कर लिए थे।

इसके बाद वह कथित पेपर लीक नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगा। CID अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र से मिली जानकारी किस-किस तक पहुंचाई गई और इसके बदले कितना पैसा लिया गया।

दिल्ली से रांची की हवाई यात्रा, सोमांश प्रकाश ने कराया खर्च
जांच में समीर और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कुछ अन्य लोगों की दिल्ली से रांची की हवाई यात्रा का भी पता चला है। इन यात्राओं के टिकट और अन्य खर्च का इंतजाम सह-अभियुक्त सोमांश प्रकाश के जरिए किए जाने की बात जांच में सामने आई है। CID अब इस यात्रा को पेपर लीक नेटवर्क की अन्य कड़ियों से जोड़कर देख रही है और यात्रा के दौरान किन लोगों से संपर्क हुआ, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।

पेपर लीक का पैसा कहां गया? दो कोचिंग संस्थान CID के रडार पर
जांच अब केवल प्रश्नपत्र लीक होने तक सीमित नहीं है। CID यह भी पता लगा रही है कि कथित पेपर लीक से जुटाया गया पैसा कहां गया और किन लोगों तक पहुंचा।

इस सिलसिले में रांची के पतंजलि IAS एकेडमी और शिवांगन की पाठशाला जांच के दायरे में हैं। आरोप है कि इन संस्थानों के जरिए अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने के लिए कथित तौर पर संगठित व्यवस्था बनाई गई थी।दोनों संस्थानों के संचालक रवि कुमार और संजीत कुमार पहले ही गिरफ्तार होकर जेल जा चुके हैं।

बैंक खातों और लेन-देन की जांच
CID दोनों कोचिंग संचालकों के बैंक खातों, आय-व्यय, ऑडिट रिपोर्ट और अन्य वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है। जांच में परीक्षा से जुड़ी एजेंसियों TDPL और Binsis Technology तथा कोचिंग संचालकों के बीच कथित मिलीभगत की भी पड़ताल की जा रही है।

समीर के खातों में मिले संदिग्ध ट्रांजैक्शन
वित्तीय जांच में समीर के बैंक खातों में भी संदिग्ध लेन-देन सामने आने की बात कही गई है। जांच के अनुसार, उसके खातों में UPI के जरिए 98 हजार रुपये और 30 हजार रुपये के ट्रांसफर दर्ज मिले हैं।

CID इन रकम के स्रोत, भेजने वाले और रकम के इस्तेमाल की जांच कर रही है। जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि इन ट्रांजैक्शन का पेपर लीक नेटवर्क से कोई सीधा संबंध है या नहीं।

पेपर लीक से ASO चयन तक जांच की कड़ी
जांच के मुताबिक, प्रश्नपत्र तैयार करने वाली एजेंसी में काम करने और परीक्षा से पहले सवाल-जवाब याद करने के आरोपों के बीच समीर खुद भी परीक्षा में शामिल हुआ था। वह सहायक अनुभाग अधिकारी (ASO) के पद पर चयनित होने में सफल रहा।अब CID उसकी भूमिका, चयन प्रक्रिया, कथित पेपर लीक और वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़ रही है।

पैसे से लेकर परीक्षा एजेंसियों तक पहुंची जांच
JSSC CGL मामले में CID की जांच का दायरा अब काफी विस्तृत हो गया है। एक ओर प्रश्नपत्र की गोपनीय प्रक्रिया से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल हो रही है, वहीं दूसरी ओर कोचिंग संस्थानों, परीक्षा एजेंसियों, कथित सिंडिकेट और पैसों के लेन-देन की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है। CID अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र की अंदरूनी जानकारी से लेकर अभ्यर्थियों तक पहुंचाने और रकम के लेन-देन तक पूरा नेटवर्क कैसे काम करता था।

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