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C.G News : नैनो क्रांति से मेगा समृद्धि की ओर बढ़ता ‘धान का कटोरा’, कृषि क्षेत्र में हो रहा है नई ऊर्जा का संचार

Woman Express
Last updated: June 18, 2026 2:47 pm
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Chhatisgarh :रायपुर। भारत की आत्मा यहाँ के गांवों में बसती है, और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में यह बात और भी सार्थक लगती है। छत्तीसगढ़ में “धान का कटोरा” भरा रहे तब ही प्रदेश का सौभाग्य बना रह सकता है। किसानों की समृद्धि को छत्तीसगढ़ में समग्र विकास का आधार कहा जा सकता है। बिगड़ते वैश्विक हालात, बढ़ती लागत और उर्वरकों की अनिश्चित आपूर्ति ने खेती को और भी चुनौतीपूर्ण बना दिया है। ऐसे विपरीत परिस्थिति में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आधुनिक तकनीक को अपनाकर कृषि क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार किया है।

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आधुनिक कृषि की क्रांतिकारी तकनीक है नैनो उर्वरक
नैनो यूरिया और नैनो डीएपी आधुनिक कृषि के क्षेत्र में आज प्रमुखता से उभर रहे हैं। पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में ये अधिक प्रभावी, सस्ते और पर्यावरण के सहयोगी हैं। 500 मिली की एक छोटी बोतल 50 किलो के पारंपरिक उर्वरक के बराबर काम कर सकती है। किसानों के लिए यह एक सुविधाजनक और किफायती विकल्प बना हुआ है।

छत्तीसगढ़ की साय सरकार का दूरदर्शी नेतृत्व
प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अग्रिम तौर पर यह महसूस किया कि भविष्य की खेती केवल परंपरागत तरीकों से नहीं चल सकती। उन्होंने प्रदेश के किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने का संकल्प लिया है। उनके प्रयासों से केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को खरीफ सीजन 2026 के लिए 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का लक्ष्य आवंटित किया गया जो राज्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा सकती है।

उर्वरक की उपलब्धता और मजबूत आपूर्ति तंत्र
छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अचूक और मजबूत रणनीति बनाई है। आज राज्य में 9.29 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 60 प्रतिशत है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि सरकार ने संभावित संकट को पहले ही भांपते हुए तैयारी कर ली है।

नैनो उर्वरकों के प्रमुख लाभ
प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ के किसानों को नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के गुनों से लाभान्वित किया है। पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में ये सस्ते होते हैं। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी से किसानों की लागत घटती है और आय बढ़ती है। पौधों की जड़ों को मजबूती और क्लोरोफिल में वृद्धि के कारण उत्पादन में वृद्धि होती है। 20-50 नैनोमीटर के सूक्ष्म कण होने के कारण ये 80% से अधिक प्रभावी होते हैं। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी ये मिट्टी की गुणवत्ता को बनाए रखते हैं और रासायनिक प्रदूषण को कम करते हैं। छोटे आकार के कारण परिवहन और भंडारण आसान और उपयोग में सुविधाजनक होता है।

वैज्ञानिक उपयोग: सही पद्धति से अधिक लाभ
छत्तीसगढ़ के कृषि विभाग द्वारा नैनो डीएपी के इस्तेमाल की वैज्ञानिक विधियां किसानों तक पहुंचाई जा रही हैं। जहां पारंपरिक डीएपी की 50 किलोग्राम की बोरी पर लगभग 1350 रुपये खर्च होते थे वहीं अब नैनो डीएपी के साथ संयुक्त उपयोग से यह लागत घटकर लगभग 1275 रुपये रह जाती है। यह अंतर छोटे स्तर पर भले कम लगता है मगर बड़े पैमाने पर यह किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि करता है।

उर्वरक संकट में समाधान की रणनीति
वैश्विक तनाव की वजह से उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने वैकल्पिक उपाय अपनाए। एनपीके, जैविक खाद, हरी खाद और नैनो उर्वरकों को बढ़ावा देकर प्रदेश सरकार ने एक संतुलित और टिकाऊ कृषि मॉडल विकसित किया है।

पारदर्शिता और सख्त निगरानी व्यवस्था
उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए राज्य की साय सरकार ने जिला स्तर पर उड़नदस्ता दल और निगरानी समितियों का गठन किया है। वितरण व्यवस्था की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि हर किसान को उसकी पात्रता के अनुसार खाद उपलब्ध हो।

फसल विविधीकरण और किसानों की आय में वृद्धि
छत्तीसगढ़ की साय सरकार राज्य के किसानों की धान पर निर्भरता कम करने के लिए दलहन, तिलहन और उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा दे रही है। ऑयल पाम, मखाना और मसाला फसलों के विस्तार से कासतकारों को नए अवसर मिल रहे हैं। इससे न केवल उनके आय में वृद्धि हो रही है बल्कि कृषि क्षेत्र में स्थायित्व भी आ रहा है।

अन्नदाता के लिए सुरक्षा कवच
प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के तहत दलहन और तिलहन फसलों की खरीदी को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है और बाजार में अस्थिरता का प्रभाव कम हो रहा है।

जनजागरूकता अभियान से कृषि क्रांति की ओर एक कदम
राज्य सरकार की ओर से “कृषि क्रांति की ओर एक कदम” अभियान के द्वारा किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग के लिए जागरूक किया जा रहा है। यह महत्वाकांक्षी अभियान किसानों को केवल तकनीकी जानकारी ही नहीं देता बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी दे रहा है।

पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में पहल
नैनो उर्वरकों का उपयोग उत्पादन बढ़ाने के साथ ही साथ पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक होता है। ये मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखते हुए जल प्रदूषण को कम करते हैं और रासायनिक उर्वरकों पर किसानों की निर्भरता घटाते हैं। यह नई शुरुआत छत्तीसगढ़ को निरंतर विकास के मार्ग पर आगे बढ़ा रही है।

तकनीक और परंपरा का संगम होगी, भविष्य की कृषि
प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दृष्टिकोण में कृषि की पारम्परिक जड़ों को मजबूत बनाए रखते हुए उसे आधुनिक बनाना है। उनका मानना है, नैनो तकनीक, जैविक खेती और पारंपरिक ज्ञान का समन्वय भविष्य की खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाएगा।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में छत्तीसगढ़ एक नई कृषि क्रांति की ओर बढ़ रहा है। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे नवाचार से जहां किसानों की आय बढ़ रही है जिससे वे तेज़ी से आत्मनिर्भर और सशक्त बन रहे हैं।

सामाजिक और आर्थिक बदलाव भी शामिल
छत्तीसगढ़ की कृषि में यह परिवर्तन केवल तकनीकी नहीं है बल्कि सामाजिक और आर्थिक बदलाव भी इसमें शामिल हैं। यह परिवर्तन छत्तीसगढ़ को एक समृद्ध, आत्मनिर्भर और आधुनिक राज्य बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रहा है। उम्मीद की जा रही है कि कृषि विकास की यह गति आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ को देश में एक आदर्श कृषि मॉडल बनाकर उभार देगी। मज़बूत इच्छाशक्ति से हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। नैनो उर्वरकों के ज़रिए छत्तीसगढ़ की धरती पर समृद्धि के नए बीज बोए जा चुके हैं—अब बस इनके पल्लवित और पुष्पित होने का इंतजार है।

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