Sandeshkhali Violence: संदेशखाली हिंसा को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट (Calcutta High Court) ने ममता सरकार (Mamta government) को फटकार लगाई है। हाई कोर्ट ने ममता सरकार को आदेश दिया है कि वो मामले की जांच के लिए सीबीआई का सहयोग करे। वहीं पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में जमीन हड़पने और महिलाओं के खिलाफ अपराध (यौन शोषण-Sexual Exploitation) मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट में गुरुवार को सुनवाई के दौरान मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission-NHRC) को भी पार्टी बनाने की परमिशन दे दी है। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस टीएस शिवगनम और जस्टिस हिरणमय भट्टाचार्य की बेंच ने CBI की रिपोर्ट को गोपनीय रखने की अपील भी मान ली। मामले की अगली सुनवाई 13 जून को होगी।
दरअसल CBI ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि उसे पश्चिम बंगाल सरकार के अधिकारियों का जांच में सहयोग नहीं मिल रहा है। मामले में एजेंसी की जांच जारी है। ऐसे में कोर्ट एजेंसी की रिपोर्ट का खुलासा करना नहीं करना चाहेगा। क्योंकि इससे जांच पर असर पड़ सकता है।
सुनवाई के दौरान CBI ने कहा कि जमीन हड़पने के 900 से ज्यादा आरोप हैं। इसलिए कोर्ट राज्य प्राधिकारियों को सहयोग करने का निर्देश दे। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर सरकार के पास कर्मचारियों की कमी है, तो अतिरिक्त कर्मचारियों तैनात किए जाएं जो CBI के साथ मिलकर काम करेंगे। कोर्ट ने 13 जून को CBI को भी प्रोग्रेस रिपोर्ट सबमिट करने कहा है।
जमीनें जबरदस्ती हड़पने का आरोप
इस मामले में यह आरोप शामिल है कि शाहजहां शेख ने गांव के निवासियों की जमीनें जबरदस्ती हड़प लीं, जिन्हें इस साल की शुरुआत में टीएमसी ने निलंबित कर दिया था। शेख और उसके सहयोगियों पर गांव में महिलाओं के यौन उत्पीड़न का भी आरोप लगाया गया था।लगभग 55 दिनों तक भागने के बाद आरोपी शेख को पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। 10 अप्रैल को पारित एक आदेश में कलकत्ता हाई कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को स्थानांतरित कर दी थी।








