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भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ आज, देश याद कर रहा स्वतंत्रता सेनानियों का बलिदान

Woman Express
Last updated: August 9, 2026 4:00 pm
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3 Min Read
8 aug
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नई दिल्ली। देश आज भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ मना रहा है। 9 अगस्त 1942 को शुरू हुआ यह आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे महत्वपूर्ण जन आंदोलनों में गिना जाता है। इस अवसर पर देशभर में स्वतंत्रता सेनानियों और आंदोलन में योगदान देने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी जा रही है। राज्यसभा में भी 9 अगस्त 2026 को आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ के अवसर पर विशेष उल्लेख किया गया।

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8 अगस्त को हुआ था ऐतिहासिक आह्वान

भारत छोड़ो आंदोलन का ऐतिहासिक आह्वान 8 अगस्त 1942 को मुंबई के गोवालिया टैंक मैदान में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक के दौरान किया गया था। महात्मा गांधी ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का आह्वान करते हुए ‘करो या मरो’ का संदेश दिया। इसके बाद 9 अगस्त से देश के अलग-अलग हिस्सों में आंदोलन ने व्यापक रूप ले लिया।

aug

नेताओं की गिरफ्तारी के बाद आंदोलन और तेज हुआ

आंदोलन शुरू होते ही ब्रिटिश सरकार ने महात्मा गांधी सहित कांग्रेस के कई प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। इसके बावजूद आंदोलन रुका नहीं। देश के विभिन्न हिस्सों में छात्रों, युवाओं, महिलाओं और आम नागरिकों ने विरोध प्रदर्शन, हड़ताल और ब्रिटिश शासन के खिलाफ आंदोलन जारी रखा।

भारत छोड़ो आंदोलन को ‘अगस्त क्रांति’ के नाम से भी जाना जाता है। यह आंदोलन ब्रिटिश शासन के खिलाफ व्यापक जनभागीदारी का प्रतीक बना और स्वतंत्रता की मांग को और मजबूत किया।
महिलाओं और युवाओं की भी रही अहम भूमिका

इस आंदोलन में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी भी महत्वपूर्ण रही। कई स्थानों पर महिलाओं ने जुलूसों और आंदोलनों का नेतृत्व किया। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अनेक लोगों ने गिरफ्तारी, लाठीचार्ज और दमन का सामना किया।

सरकारी ऐतिहासिक अभिलेखों में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बलिदान देने वाले कई स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों का उल्लेख मिलता है। असम, महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश और अन्य क्षेत्रों में आंदोलनकारियों ने तिरंगा फहराने और ब्रिटिश शासन का विरोध करने के प्रयास किए।
आज भी क्यों महत्वपूर्ण है यह दिन?

भारत छोड़ो आंदोलन ने देश के स्वतंत्रता संघर्ष को निर्णायक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस आंदोलन ने बड़ी संख्या में भारतीयों को एकजुट किया और ब्रिटिश शासन से पूर्ण स्वतंत्रता की मांग को जन आंदोलन में बदल दिया।

9 अगस्त 2026 को इसकी 84वीं वर्षगांठ पर स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और संघर्ष को याद करना देश के स्वतंत्रता इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर भी है।

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