Advertisement Carousel

कनकबीरा से बरमकेला और सिंघारी तक बाघ के निशान, वन विभाग को अब तक नहीं मिला ठिकाना

Woman Express
4 Min Read

सारंगढ़-बिलाईगढ़। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़ जिले के ग्रामीण अंचलों में बाघ के विचरण की लगातार मिल रही सूचनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। एक के बाद एक अलग-अलग इलाकों में बाघ के पदचिह्न मिलने की खबर सामने आ रही है, लेकिन वन विभाग अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि बाघ वर्तमान में किस क्षेत्र में मौजूद है और उसका विचरण किस दिशा में हो रहा है।

वन विभाग कर रहा पुष्टि, अब भी लोकेशन का पता नहीं
हालात ऐसे हैं कि, ग्रामीण जहां-जहां पदचिह्न मिलने की सूचना दे रहे हैं, वन अमला मौके पर पहुंचकर उनकी पुष्टि कर रहा है, लेकिन बाघ की वास्तविक लोकेशन अब भी पहेली बनी हुई है। जानकारी के मुताबिक, सबसे पहले कनकबीरा के रामटेक क्षेत्र में बाघ के पदचिह्न मिलने की सूचना सामने आई। इसके बाद बरमकेला ब्लॉक के अंतिम छोर पर छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा से लगे बरधरा चौक और खैरगढ़ी के आसपास बाघ के पदचिह्न देखे जाने की खबर आई।

सिंघारी गांव में किसान के खेत में मिले बाघ के पदचिह्न
अब बरमकेला ब्लॉक के सिंघारी गांव में किसान गंगाराम पटेल के खेत में भी बाघ के पदचिह्न मिलने की सूचना ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है। लगातार अलग-अलग स्थानों पर पदचिह्न मिलने से सबसे बड़ा सवाल यह है कि, आखिर बाघ किस दिशा में बढ़ रहा है? क्या वह गांवों के आसपास ही विचरण कर रहा है या जंगलों के रास्ते एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में पहुंच रहा है? इन सवालों का जवाब फिलहाल ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है।

वन विभाग की निगरानी पर सवाल
लगातार मिल रही सूचनाओं के बीच वन विभाग की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे जहां-जहां बाघ के पदचिह्न देख रहे हैं, वहां वन अमले को सूचना दे रहे हैं और विभाग मौके पर पहुंचकर पदचिह्नों की पुष्टि कर रहा है। लेकिन अब तक बाघ की गतिविधियों, उसकी दिशा और वास्तविक लोकेशन को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है।

ग्रामीणों में खौफ, सुरक्षा की मांग
लगातार बाघ के विचरण की खबरों से ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल है। खेतों में जाने वाले किसान, जंगल के आसपास रहने वाले ग्रामीण और मवेशी चराने जाने वाले लोग विशेष रूप से चिंतित हैं। ग्रामीणों की मांग है कि, वन विभाग केवल पदचिह्नों की पुष्टि तक सीमित न रहे, बल्कि कैमरा ट्रैप, नियमित गश्त और विशेष निगरानी दल के माध्यम से बाघ की लोकेशन का पता लगाए। साथ ही गांवों में मुनादी कर लोगों को सतर्क रहने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि वन विभाग आखिर कब तक बाघ के पदचिह्न गिनता रहेगा और कब उसकी वास्तविक लोकेशन का पता लगा पाएगा? ग्रामीणों को बाघ की मौजूदगी की पुष्टि से ज्यादा अपनी और अपने मवेशियों की सुरक्षा की चिंता सता रही है।

TAGGED:
Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *