Success Story of Chandrika Chandrakar: छत्तीसगढ़ की बेटी स्मारिका चंद्राकर ने पांच साल नौकरी करने के बाद खेती-किसानी का रुख किया। आज वह 125 लोगों को रोजगार दे रही हैं और उनका सालाना टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये है।
आइए जानते है एक कॉरपोरेट एग्जीक्यूटिव ने खेती में करियर कैसे बनाया :
कॉरपोरेट की नौकरी (Corporate Job) छोड़कर खेती-किसानी का रुख करना आसान नहीं था लेकिन छत्तीसगढ़ की स्मारिका चंद्राकर ने साबित कर दिया कि खेती से भी प्रॉफिट कमाया जा सकता है। स्मारिका ने पांच साल पुणे में कॉरपोरेट जगत में काम करने के बाद खेती का रुख किया और आज उनका सालाना टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये है। उनके खेतों में 125 लोगो को रोजगार मिला है और वह उपज बढ़ाने के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना चाहती हैं। उनका कहना है कि लोगों में यह धारणा है कि खेती से प्रॉफिट नहीं कमाया जा सकता है। लेकिन यह सच्चाई नहीं है। उन्होंने खुद दुनिया को दिखाया है कि खेती से भी पैसा कमाया जा सकता है।

एमबीए ग्रेजुएट स्मारिका का संबंध छत्तीसगढ़ के चारमुडिया गांव के एक किसान परिवार से है। उनका बचपन गांव में धान के खेतों के बीच गुजरा जहां उन्होंने अपने पिता – दादा से जीवन और खेती बाड़ी का ककहरा सीखा। रायपुर से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग करने के बाद उन्होंने पुणे से एमबीए किया। पुणे में पांच साल तक बिजनस डेवलपमेंट एग्जीक्यूटिव के तौर पर काम करने के बाद उन्होंने रायपुर में अपने परिवार के करीब जाने का फैसला किया। वीकेंड पर वह अक्सर खेतों में जाया करती थीं। उन्होंने धान की खेती की बारीकियां सीखने लगीं। इस दौरान अक्सर उपज और प्रॉफिट बढ़ाने पर चर्चा होती।
1.5 करोड़ रुपये का टर्नओवर
स्मारिका ने महसूस किया कि धान के बजाय सब्जियों की खेती ज्यादा मुनाफे वाली हो सकती है। उन्होंने धीरे-धीरे इस पर काम करना शुरू किया। इसका परिणाम शानदार रहा। 2021 में उन्होंने नौकरी छोड़कर खेती का रुख किया और 20 एकड़ से अधिक जमीन पर सब्जी उगानी शुरू कर दी। पिछले तीन साल में उन्हें हर एकड़ में करीब 50 टन टमाटर की पैदावार हासिल की। पिछले फाइनेंशियल ईयर में उनका टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये रहा। उनके खेतों में उगने वाले टमाटर विशाखापटनम, पटना, कोलकाता, दिल्ली, बेंगलुरु और कई दूसरे शहरों को भेजे जाते हैं।

स्मारिका ने बताया कि पहले उन्होंने गोबर और वर्मिकोपोस्ट से मिट्टी में सुधार किया। उसके बाद सिंचाई की व्यवस्था को दुरुस्त किया। इसका नतीजा यह हुआ कि पहले साल में ही उन्हें प्रति एकड़ करीब 50 टन टमाटर की फसल मिली। टमाटर के अलावा वह लौंकी, खीरे और बैंगन की भी खेती करती हैं। उन्होंने कहा कि धान की खेती तो साल में केवल दो बार हो सकती है लेकिन सब्जियां कई बार उगाई जा सकती हैं। इससे ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है। स्मारिका अभी 20 एकड़ में खेती कर रही हैं लेकिन आने वाले दिनों में उनकी योजना और 15 एकड़ जमीन में खेती करने की है। स्मारिका के पिता और भाई भी खेती में उनकी मदद करते हैं।








