रायपुर। छत्तीसगढ़ में पटवारियों की हड़ताल को लेकर सरकार और पटवारी संघ के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। शासन की ओर से सख्ती और निलंबन सहित ब्रेक इन सर्विस जैसी कार्रवाई किए जाने के बीच पटवारी संघ ने साफ कर दिया है कि वह अपनी मांगों से पीछे हटने वाला नहीं है। वहीं, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने पटवारियों से हड़ताल समाप्त कर बातचीत के लिए आगे आने की अपील की है।
पटवारी संघ के अध्यक्ष भागवत कश्यप ने सरकार की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि शासन उनकी मांगों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रहा है। इसके बजाय आंदोलन को दबाने के लिए निलंबन और ब्रेक इन सर्विस जैसी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि संघ का कोई भी सदस्य इस तरह की कार्रवाई से डरने वाला नहीं है और पटवारी अपनी मांगों पर अडिग हैं।
वेतन विसंगति और पद से जुड़े अधिकारों का मुद्दा
भागवत कश्यप के मुताबिक, पटवारियों की वेतन विसंगति और पद से जुड़े अधिकारों की मांग लंबे समय से लंबित है। संघ चाहता है कि सरकार इन मुद्दों पर सकारात्मक पहल करे। उन्होंने मांग की कि आंदोलन के दौरान की गई सभी दमनात्मक कार्रवाइयों को तत्काल शून्य किया जाए। साथ ही सरकार पटवारी प्रतिनिधियों से बातचीत कर समस्याओं का समाधान निकाले।
मंत्री टंकराम वर्मा बोले- धान खरीदी के समय हड़ताल उचित नहीं
दूसरी ओर, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने पटवारियों की हड़ताल के समय पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पटवारियों ने हड़ताल को लेकर शासन को सही तरीके से सूचित नहीं किया है। प्रदेश में धान खरीदी की प्रक्रिया शुरू होने वाली है और ऐसे समय में हड़ताल करना उचित नहीं है। इससे किसानों को परेशानी हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पटवारी ऐसे समय पर हड़ताल कर रहे हैं, जब किसानों को राजस्व संबंधी कामों के लिए पटवारियों की जरूरत पड़ेगी। उन्होंने कहा कि सरकार बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है। पटवारियों को पहले हड़ताल समाप्त करनी चाहिए और फिर अपनी समस्याओं को लेकर सरकार के साथ चर्चा करनी चाहिए।
आंदोलन और बातचीत के बीच बढ़ा गतिरोध
एक तरफ पटवारी संघ लंबित मांगों के समाधान और कार्रवाई वापस लेने पर अड़ा है, तो दूसरी ओर सरकार हड़ताल खत्म कर बातचीत शुरू करने की बात कह रही है। अब देखना होगा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत का रास्ता निकलता है या प्रदेश में पटवारियों का आंदोलन आगे भी जारी रहता है।
