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मंदिर में प्रवेश से पहले देना होगा शपथ पत्र? मद्रास हाईकोर्ट के आदेश से तमिलनाडु में नई बहस

Woman Express
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तमिलनाडु के ऐतिहासिक और पारंपरिक आगमिक मंदिरों में पूजा पद्धति, अनुशासन और गर्भगृह के आसपास की पवित्रता बनाए रखने के लिए सदियों पुराने नियम और परंपराएं लागू हैं। इन मंदिरों में ‘कोडीमारम’ यानी ध्वज-स्तंभ को आध्यात्मिक सीमा माना जाता है, जिसके आगे केवल वही लोग जा सकते हैं जो संबंधित देवी-देवता और आगमिक रीति-रिवाजों में निष्ठा रखते हों।

हाल के दिनों में सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों से ऐसी कई घटनाएं सामने आई थीं, जहां कुछ गैर-हिंदू अपने धार्मिक प्रतीकों के साथ मंदिरों के भीतरी हिस्सों तक पहुंचे और विवाद की स्थिति पैदा हुई। भक्तों और मंदिर प्रबंधन के बीच उपजे तनाव के बाद मदुरै के एक श्रद्धालु ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिस पर अदालत ने मंदिर की आध्यात्मिक मर्यादा और आगमिक नियमों के संरक्षण को सर्वोपरि मानते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

बिना लिखित सहमति ध्वज-स्तंभ से आगे जाने पर पूर्ण प्रतिबंध
न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन और न्यायमूर्ति पी. मुरुगन की खंडपीठ ने मदुरै निवासी के. थंगम वेंकटेश की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि आगमिक मंदिरों के ट्रस्टी नियमों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करें।

अदालत ने कहा कि जो गैर-हिंदू अपने धार्मिक पहचान वाले चिह्न पहनकर आते हैं और मंदिर के देवता में श्रद्धा नहीं रखते, उन्हें परिसर में घुसने की छूट नहीं दी जा सकती। यदि कोई गैर-हिंदू श्रद्धालु भीतर जाना चाहता है, तो उसे मंदिर प्रशासन द्वारा तय प्रारूप में लिखित शपथ पत्र देना होगा कि वह संबंधित देवता में आस्था रखता है और मंदिर की परंपराओं का सम्मान करेगा।

मुख्यमंत्री विजय के कदम की सराहना, टीवीके विधायक को फटकार
सुनवाई के दौरान अदालत ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा पूर्व में पेश किए गए उदाहरण की प्रशंसा की। अदालत ने बताया कि ईसाई समुदाय से ताल्लुक रखने वाले मुख्यमंत्री विजय ने मदुरै के मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर और तिरुचेंदुर मुरुगन मंदिर में दर्शन के दौरान ‘कोडीमारम’ पार करने से पहले अपनी आस्था का शपथ पत्र दिया था, जो एक सच्चा समावेशी दृष्टिकोण है।

इसके विपरीत, अदालत ने टीवीके (TVK) के विधायक बदरुद्दीन मुस्तफा के आचरण पर सख्त ऐतराज जताया। अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सनातन धर्म को लेकर पहले विवादित बयान देने वाले विधायक ने चुनाव जीतने के बाद नियमों की अनदेखी की और मीनाक्षी मंदिर परिसर के साथ-साथ कुम्भाभिषेकम के दौरान गोपुरम के शिखर तक पहुंच गए।

तिरुवन्नामलाई की घटना और प्रशासन की ढिलाई पर चिंता
उच्च न्यायालय ने सोशल मीडिया पर सामने आई उन घटनाओं का भी स्वतः संज्ञान लिया, जिनमें तिरुवन्नामलाई के प्रसिद्ध अरुणाचलेश्वर मंदिर में सिर पर टोपी पहने कुछ गैर-हिंदू जबरन आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। श्रद्धालुओं द्वारा तीखा विरोध जताए जाने के बाद भी मौके पर मौजूद हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के कर्मियों के मूकदर्शक बने रहने पर कोर्ट ने गहरी चिंता जताई। इसके अलावा अदालत ने एक अन्य मंत्री के बिना शपथ पत्र तिरुचेंदूर मंदिर में प्रवेश करने की घटना को भी नियमों का खुला उल्लंघन करार दिया।

मंदिर की पवित्रता और आस्था की रक्षा याचिकाकर्ता का हक
अदालत ने अपने आदेश में यह स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि याचिकाकर्ता एक हिंदू नागरिक होने के नाते यह मांग करने का पूरा कानूनी अधिकार रखता है कि मंदिरों में आगमिक नियमों की रक्षा की जाए। पीठ ने कहा कि यदि बिना अंडरटेकिंग के लोगों को भीतर जाने की खुली छूट दी गई तो इससे सदियों पुरानी मंदिर व्यवस्था और उसकी शुचिता खंडित होगी। इसलिए मंदिर प्रबंधन को कड़े सुरक्षा घेरे और अनिवार्य लिखित सहमति की प्रक्रिया को बिना किसी अपवाद के लागू करना होगा।

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