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मनरेगा के 20 लाख रुपये पानी में? सिलफिली में 6 महीने में ही धराशायी हुआ चेकडैम

Woman Express
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Balrampur: बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत सिलफिली में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत करीब 20 लाख रुपये की लागत से बनाए गए चेकडैम के महज छह महीने में क्षतिग्रस्त होने का मामला सामने आया है. चेकडैम टूटकर करीब छह हिस्सों में बिखर गया है. निर्माण की इतनी कम अवधि में चेकडैम के क्षतिग्रस्त होने से निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

छह महीने में ही टूट गया चेकडैम
जानकारी के मुताबिक, किसानों के खेतों की सिंचाई और जल संरक्षण के उद्देश्य से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत ग्राम पंचायत सिलफिली में चेकडैम का निर्माण कराया गया था. इसके निर्माण में करीब 20 लाख रुपये की लागत आई थी. लेकिन निर्माण पूरा होने के महज छह महीने बाद ही चेकडैम का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया. स्थिति यह है कि चेकडैम करीब छह अलग-अलग हिस्सों में टूटकर बिखरा हुआ नजर आ रहा है.

निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल
चेकडैम के इतनी कम अवधि में टूटने से निर्माण कार्य में इस्तेमाल की गई सामग्री और निर्धारित तकनीकी मानकों को लेकर सवाल उठ रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया, जिसके कारण लाखों रुपये की लागत से तैयार चेकडैम कुछ ही महीनों में जवाब दे गया.

ग्रामीणों ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप
ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए पूरे मामले की तकनीकी जांच की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजना के तहत खर्च हुई इतनी बड़ी राशि के बावजूद निर्माण छह महीने भी नहीं टिक पाया, ऐसे में निर्माण की गुणवत्ता और कार्य की निगरानी की जांच जरूरी है. ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि चेकडैम निर्माण की तकनीकी जांच कराई जाए, निर्माण में इस्तेमाल सामग्री और स्वीकृत राशि की जांच हो तथा दोषी पाए जाने वाले जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.

सिलसिली ग्राम पंचायत के अलावा आसपास के दूसरे ग्राम पंचायत में भी इसी तरीके से रोजगार गारंटी योजना के तहत चेक डैम का निर्माण किया गया था वह निर्माण भी पूरी तरीके से टूट चुका है. सवाल उठ रहा है कि आखिर निर्माण कार्यों का सत्यापन मूल्यांकन और मॉनिटरिंग करने वाले इंजीनियर, SDO और विभाग के अधिकारी इतनी बड़ी लापरवाही क्यों बरत रहे हैं? बताया जाता है कि आरईएस डिपार्टमेंट के अधिकारियों के द्वारा जानबूझकर जब घटिया निर्माण होता है उस दौरान ध्यान नहीं दिया जाता है और ऐसी स्थिति बनती है.

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