गांव की लड़की से सेना की अफसर..सोलन की कर्नल सपना राणा कमांडिंग आफिसर, सेना में प्रदेश से पहली महिला अधिकारी बन रचा इतिहास …

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हिमाचल के छोटे से गांव से सेना की बुलंदी तक पहुंचने वाली कर्नल सपना राणा अब पहचान की मोहताज नहीं हैं

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Colonel Sapna Rana: सोलन जिला के बढलग (भवानीपुर) गांव की बेटी कर्नल सपना राणा ने भारतीय सेना में प्रदेश से पहली महिला कमांडिंग आफिसर बन कर इतिहास रच दिया है। कर्नल राणा वर्तमान में भारत के नोर्थ-ईस्ट सेना सेवा कोर (एएससी) में बतौर बटालियन कमांडर अपनी सेवाएं दे रही हैं। 1एचपी गल्र्स बीएन एनसीसी सोलन की पूर्व कैडेट कर्नल सपना राणा ने प्रदेश से बटालियन का नेतृत्व करने वाली पहली महिला कमांडिंग आफिसर हैं। सपना राणा का जन्म सोलन जिला के बढलग (भवानीपुर) में अध्यापक राजेंद्र ठाकुर और गृहिणी कृष्णा ठाकुर के घर 14 दिसंबर, 1980 को हुआ। मैट्रिक तक की शिक्षा सीनियर सेकेंडरी स्कूल चंडी से हुई। इसके बाद गल्र्ज सीनियर सेकेंडरी स्कूल सोलन से जमा एक व दो की परीक्षा उत्तीर्ण की। आगे की शिक्षा के लिए पीजी कालेज सोलन में एडमिशन ली। यहां से उन्होंने बीकॉम की डिग्री हासिल की। बिजनेस मैनेजमेंट में उन्होंने पीजी करने के लिए एचपी यूनिवर्सिटी में प्रवेश लिया। सैन्य उत्कृष्टता की ओर सपना राणा की यात्रा उनके कालेज के दिनों के दौरान शुरू हुई, जब उन्होंने सोलन में 1 एचपी गल्र्स एनसीसी बटालियन में सीनियर अंडर आफिसर के रूप में कार्य किया। एक कैडेट के रूप में वह एक बहुत ही समर्पित और अनुशासित कैडेट थीं। उस समय वह हिमाचल से एकमात्र एनसीसी कैडेट थी, जिसका चयन कारगिल सेक्टर में प्रतिष्ठित कारगिल विजय शिविर के लिए हुआ था।

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जब सपना राणा बिजनेस मैनजमेंट में एचपी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही थी, इसी दौरान सेवा चयन बोर्ड (एसएसबी) में उत्तीर्ण होने के बाद, कर्नल राणा 2003 में चेन्नई में अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी में शामिल हो गईं। 2004 में भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में अपना कमीशन अर्जित किया। अपने पूरे प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने उत्कृष्ट एथलेटिजिज्म का प्रदर्शन किया, क्रॉस कंट्री, बाधा प्रशिक्षण में स्वर्ण पदक जीते और अकादमी सहनशक्ति प्रशिक्षण समेत सभी मानकों पर खरी उतरी। 1 एचपी गल्र्स बटालियन एनसीसी सोलन की पूर्व कैडेट के रूप में, कर्नल राणा ने पहली महिला कमांडिंग आफिसर बनने की उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करके हिमाचल को गौरवान्वित किया है। सेना में उनके समर्पण और उत्कृष्ट प्रदर्शन ने उन्हें तीन बार प्रतिष्ठित सीओएएस और जनरल आफिसर कमांडिंग-इन -चीफ प्रशस्ति पत्र मिला है।

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