युवाओं को आधुनिकता के साथ भारतीय मूल्यों को अपनाने की सलाह, मोहन भागवत का बड़ा संदेश

Mohan Bhagwat

RSS Chief Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि तेजी से बदलते दौर में परिवारों के भीतर संवाद बनाए रखना बेहद आवश्यक है. उनका मानना है कि आधुनिक जीवनशैली और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के कारण परिवार के सदस्य एक-दूसरे के साथ कम समय बिता रहे हैं, जिससे आपसी समझ और भावनात्मक जुड़ाव कमजोर हो रहा है.

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उन्होंने कहा कि परिवार किसी भी व्यक्ति के जीवन की पहली पाठशाला होता है. यहीं से बच्चों को संस्कार, अनुशासन, जिम्मेदारी और सामाजिक व्यवहार की सीख मिलती है. यदि परिवारों में खुलकर बातचीत का माहौल रहेगा तो नई पीढ़ी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेगी और सही-गलत का निर्णय लेने में सक्षम होगी.

युवा ही देश की सबसे बड़ी ताकत-भागवत
भागवत ने युवाओं को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि उनमें नई सोच और बदलाव लाने की क्षमता है. हालांकि, इस क्षमता का सही उपयोग तभी हो सकता है जब उन्हें परिवार और समाज से सकारात्मक मार्गदर्शन मिले. उन्होंने कहा कि केवल आधुनिक शिक्षा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों का ज्ञान भी युवाओं के व्यक्तित्व को मजबूत बनाता है.

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि माता-पिता को बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार करना चाहिए, ताकि वे बिना किसी डर या झिझक के अपनी समस्याएं साझा कर सकें. परिवारों में विश्वास और संवाद का वातावरण बनने से कई सामाजिक और मानसिक चुनौतियों का समाधान आसानी से निकल सकता है.

भागवत ने किस बात पर द‍िया जोर
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में उन्होंने सामाजिक एकता, सहयोग और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने की अपील की. उनका कहना था कि जब परिवार मजबूत होंगे, तभी समाज संगठित और राष्ट्र सशक्त बनेगा. उन्होंने सभी लोगों से आग्रह किया कि वे अपने व्यस्त जीवन में परिवार के लिए समय निकालें, एक-दूसरे की भावनाओं को समझें और आने वाली पीढ़ी को ऐसे संस्कार दें, जो उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने के साथ-साथ समाज और देश के प्रति अपने कर्तव्यों का भी बोध कराएं. इसी दिशा में परिवार, समाज और युवा मिलकर एक सकारात्मक और सशक्त भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

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