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केशकाल के जंगल में पेड़ों की कथित अवैध कटाई का मामला, ओडिशा के व्यापारी को लकड़ी बेचने का आरोप

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केशकाल। वन मंडल केशकाल के बड़े राजपुर (विश्रामपुरी) वन परिक्षेत्र अंतर्गत बांसकोट के बीट क्रमांक 1332 में सरकारी जमीन पर लगे नीलगिरी के पेड़ों की कथित अवैध कटाई और बिक्री का मामला सामने आया है। करीब 45 से 50 परिपक्व पेड़ों को काटे जाने के आरोपों के बीच केशकाल के पूर्व विधायक कृष्ण कुमार ध्रुव ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और यदि वनकर्मियों की लापरवाही या संलिप्तता सामने आए तो उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करने की बात कही है।

15 साल पहले लगाए गए पेड़ों की कटाई का आरोप
पूर्व विधायक कृष्ण कुमार ध्रुव के मुताबिक, ग्राम राहटीपारा, ग्राम पंचायत बोलेगा के अंतर्गत आने वाले बीट क्रमांक 1332 में वन विभाग ने करीब 15 वर्ष पहले नीलगिरी के पौधे लगाए थे। आरोप है कि इनमें से 45 से 50 विकसित पेड़ों को काट दिया गया। पेड़ों की गोलाई लगभग 60 से 70 सेंटीमीटर बताई जा रही है। श्री ध्रुव ने दावा किया है कि इन पेड़ों की कटाई के बाद लकड़ी को बिना वैधानिक विभागीय प्रक्रिया और नीलामी के ओडिशा के एक व्यापारी को करीब तीन लाख रुपये में बेच दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी वन संपदा की कटाई और बिक्री बिना अनुमति के हुई है, तो यह गंभीर मामला है। इतनी बड़ी मात्रा में लकड़ी का परिवहन दूसरे राज्य तक होना भी जांच का विषय है।

स्थानीय वन अमले की भूमिका की जांच की मांग
पूर्व विधायक ने कहा कि वन संपदा की सुरक्षा की जिम्मेदारी वन विभाग की है। ऐसे में यह पता लगाया जाना जरूरी है कि पेड़ों की कटाई किसके आदेश या अनुमति से हुई और लकड़ी का परिवहन किन परिस्थितियों में किया गया। उन्होंने स्थानीय वन अमले की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही, मिलीभगत या अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वन संपदा को उन्होंने आने वाली पीढ़ियों की प्राकृतिक धरोहर बताते हुए इसकी सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही।

ध्रुव ने प्रशासन के सामने रखीं तीन मांगें
कृष्ण कुमार ध्रुव ने शासन और प्रशासन से इस मामले में तीन प्रमुख कदम उठाने की मांग की है।

  1. मौके का निरीक्षण और पंचनामा: वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी स्वयं घटनास्थल पर पहुंचकर कटे पेड़ों की संख्या, उनकी स्थिति और लकड़ी के परिवहन से जुड़े तथ्यों की जांच करें तथा पंचनामा तैयार करें।
  2. दोषियों पर FIR: जांच में अवैध कटाई और लकड़ी की तस्करी में शामिल पाए जाने वाले व्यक्तियों, बिचौलियों और व्यापारी के खिलाफ वन अधिनियम के त हत आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए।
  3. जिम्मेदार वनकर्मियों पर कार्रवाई: यदि जांच में बीट गार्ड या अन्य वनकर्मियों की लापरवाही अथवा संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ निलंबन सहित नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाए।

निष्पक्ष जांच से सामने आएगी वास्तविक स्थिति
पूर्व विधायक ने जिला प्रशासन और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्चस्तरीय जांच कराने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्ति और प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

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