जबलपुर। शहर का नया मास्टर प्लान जारी करने में हो रही लंबी देरी को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने प्रमुख सचिव और डायरेक्टर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) को शपथ पत्र के जरिए जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी पूछा है कि बार-बार निर्देश के बावजूद नया मास्टर प्लान अब तक क्यों प्रकाशित नहीं किया गया?मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी।
125 गांव बे-प्लान
दरअसल माह अप्रैल की सुनवाई में हाईकोर्ट ने हर हाल में मास्टर प्लान जमा करने के निर्देश दिए थे। आदेश का पालन न होने पर हाईकोर्ट पहले ही अवमानना नोटिस जारी कर चुका है, जिसके बावजूद स्थिति जस की तस है। जबलपुर का पुराना मास्टर प्लान 2008 से प्रभावी था, जिसकी मियाद 2021 में पूरी हो चुकी है। तब से लेकर अब तक नया प्लान पब्लिश नहीं हुआ है। वर्ष 2014 में 125 ग्राम जबलपुर नगर निगम सीमा में शामिल किए गए थे, लेकिन इन क्षेत्रों के विकास के लिए भी कोई योजना या मास्टर प्लान तैयार नहीं किया गया है।
शहर पर असर और नुकसान, अवरुद्ध विकास
नए प्रोजेक्ट्स की स्वीकृति अटक गई है, जिससे शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर और विस्तार थम सा गया है। मास्टर प्लान के अभाव में मनमाने और अवैध निर्माण धड़ल्ले से फल-फूल रहे हैं। अवैध निर्माणों और रुकी प्रोजेक्ट स्वीकृतियों के चलते सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। याचिकाकर्ता के वकील दिनेश उपाध्याय ने बताया कि कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों की अवहेलना हो रही है, जिससे आम जनता और निर्माण क्षेत्र दोनों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। इसी के मद्देनजर अदालत ने जवाब तलब किया है।
