कृष्ण की लीलाओं से जुड़ी है ब्रज की ये पावन धरती, 84 कोस में बसे हैं कान्हा के 6 प्रमुख धाम

Woman Express
3 Min Read

मथुरा से बरसाना और गोवर्धन तक, हर कदम पर जुड़ी है श्रीकृष्ण की कोई न कोई लीला

Advertisement Carousel

मथुरा। उत्तर प्रदेश का ब्रज क्षेत्र भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और राधा-कृष्ण की भक्ति से जुड़ा प्रमुख तीर्थ क्षेत्र माना जाता है। यहां चौरासी कोस ब्रज परिक्रमा का विशेष धार्मिक महत्व है। मथुरा जिला प्रशासन के अनुसार यह परिक्रमा करीब 252 किलोमीटर की है और इसके मार्ग में मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना, नंदगांव, गोकुल, महावन और बलदेव समेत अनेक पवित्र स्थल आते हैं।

veindavan2 1

ये 6 प्रमुख धाम हैं बेहद खास

  1. मथुरा – कृष्ण जन्मभूमि की नगरी
    मथुरा को भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि के रूप में जाना जाता है। यहां श्रीकृष्ण जन्मस्थान, विश्राम घाट और द्वारकाधीश मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल हैं।
  2. वृंदावन – कान्हा की रास और भक्ति की भूमि
    वृंदावन श्रीकृष्ण की बाल एवं किशोर लीलाओं से जुड़ा प्रमुख तीर्थ है। यहां बांके बिहारी मंदिर सहित अनेक प्राचीन मंदिर और कुंज हैं।
  3. गोवर्धन – गिरिराज महाराज की धरती
    गोवर्धन पर्वत ब्रज यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है। धार्मिक परंपरा में इसे श्रीकृष्ण द्वारा इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों की रक्षा करने वाली लीला से जोड़ा जाता है। गोवर्धन की करीब 21 किमी की परिक्रमा भी बेहद प्रसिद्ध है।
  4. बरसाना – राधारानी की नगरी
    बरसाना को राधारानी की भूमि माना जाता है। यहां स्थित राधारानी मंदिर और ब्रज की प्रसिद्ध लट्ठमार होली देश-दुनिया के श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।
  5. नंदगांव – नंद बाबा और यशोदा मैया की यादें
    नंदगांव को भगवान कृष्ण के पालन-पोषण से जुड़ी भूमि माना जाता है। यहां नंद बाबा का मंदिर प्रमुख धार्मिक स्थल है।
  6. गोकुल-महावन – कान्हा के बाल रूप की यादें
    गोकुल और महावन क्षेत्र श्रीकृष्ण के बचपन की कथाओं से जुड़े हैं। यहां नंद भवन, रमण रेती और यमुना तट जैसे धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखते हैं।
vrindavan 1

84 कोस परिक्रमा क्यों है खास?

चौरासी कोस ब्रज परिक्रमा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि ब्रज की पूरी आध्यात्मिक परंपरा को करीब से महसूस करने का अवसर मानी जाती है। पारंपरिक ब्रज परिक्रमा में 12 वन, अनेक कुंड, उपवन और कृष्ण-राधा से जुड़े गांव एवं तीर्थ शामिल होते हैं।

यही वजह है कि ब्रज आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मथुरा से बरसाना, नंदगांव, गोवर्धन, वृंदावन और गोकुल तक का सफर सिर्फ यात्रा नहीं, बल्कि कान्हा की लीलाओं को याद करने वाला आध्यात्मिक अनुभव बन जाता है।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *