रायपुर: क्षत्रिय करणी सेना ने संगठन के नाम पर किए जा रहे कथित फर्जी दावों और भ्रामक प्रचार का खंडन करते हुए कहा है कि कुछ लोग स्वयं को संगठन का पदाधिकारी या प्रदेश अध्यक्ष बताकर मीडिया एवं सोशल मीडिया के माध्यम से भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। संगठन ने ऐसे दावों को पूरी तरह निराधार बताते हुए जनता से सतर्क रहने की अपील की है।
संगठन के अनुसार, जिन व्यक्तियों को पूर्व में अनुशासनहीनता, संगठन-विरोधी गतिविधियों अथवा अन्य कारणों से निष्कासित किया जा चुका है, उनका करणी सेना से अब किसी प्रकार का कोई संबंध नहीं है। इसके बावजूद कुछ लोग व्यक्तिगत हितों के चलते संगठन के नाम का उपयोग कर समाज में भ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं।
करणी सेना ने स्पष्ट किया कि संगठन से संबंधित किसी भी जानकारी की पुष्टि केवल अधिकृत पदाधिकारियों और आधिकारिक मंचों से ही की जानी चाहिए। संगठन का कहना है कि उसके नाम पर फैलाए जा रहे भ्रामक प्रचार का उद्देश्य समाज को गुमराह करना और संगठन की छवि को नुकसान पहुंचाना है।

संगठन का यह भी दावा है कि करणी सेना की बढ़ती सक्रियता, जनसमर्थन और सामाजिक मुद्दों पर मुखर भूमिका से कुछ स्वार्थी तत्व असहज हैं। इसी कारण संगठन को कमजोर करने और कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराने के लिए इस तरह के प्रयास किए जा रहे हैं।
करणी सेना ने कहा कि वह समाज और जनहित के मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाती रहेगी तथा किसी भी प्रकार के दुष्प्रचार या दबाव से प्रभावित नहीं होगी। साथ ही संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यक्ति या समूह संगठन के नाम का दुरुपयोग कर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास करता है, तो उसके विरुद्ध वैधानिक और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत उचित कार्रवाई की जाएगी।
संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व ने भी स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ में करणी सेना के अधिकृत नेतृत्व को लेकर किसी प्रकार का भ्रम नहीं है और निष्कासित व्यक्तियों के किसी भी दावे को संगठन मान्यता नहीं देता।
अंत में करणी सेना ने प्रदेशवासियों और समाजजनों से अपील की है कि वे किसी भी अपुष्ट जानकारी, अफवाह या भ्रामक दावे पर विश्वास न करें तथा संगठन से संबंधित जानकारी केवल आधिकारिक स्रोतों से ही प्राप्त करें।








