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गणेश जी की पूजा में तुलसी क्यों है वर्जित, जानिए इसके पीछे छिपी अनोखी पौराणिक कहानी …

Woman Express
Last updated: July 16, 2026 4:22 pm
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2 Min Read
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ganpati

हिन्दू धर्म में भगवान गणेश की पूजा में तुलसी कभी नहीं चढ़ाई जाती है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा है। कथा के अनुसार, तुलसी माता ने गणेश जी को विवाह का प्रस्ताव दिया था। गणेश जी ने मना कर दिया और दोनों के बीच आपसी श्राप हो गया था।

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पौराणिक कथा का पूरा विवरण नीचे दिया गया है:
तुलसी का प्रस्ताव: एक बार देवी तुलसी (जो पहले वृंदा नाम की तपस्विनी थीं) वन में तपस्या कर रहे भगवान गणेश के पास गईं। वे गणेश जी के रूप पर मोहित हो गईं और उनसे विवाह की इच्छा जताई।


गणेश जी का जवाब: गणेश जी ने उन्हें बताया कि वे ब्रह्मचारी (बिना शादी के रहने वाले) हैं और वे शादी नहीं करेंगे।
तुलसी का गुस्सा: बार-बार आग्रह करने पर भी जब गणेश जी नहीं माने, तो तुलसी जी को बहुत गुस्सा आया। उन्होंने गणेश जी को श्राप दे दिया कि तुम्हारी एक नहीं, बल्कि दो शादियां होंगी

गणेश जी का पलटवार: इस श्राप से क्रोधित होकर गणेश जी ने भी तुलसी को श्राप दे दिया कि तुम्हारा विवाह एक असुर (राक्षस) के साथ होगा।

तुलसी का पश्चाताप और वरदान :
अपनी गलती का अहसास होने पर तुलसी जी ने गणेश जी से माफी मांगी।
गणेश जी ने उनका श्राप कम कर दिया। उन्होंने वरदान दिया कि तुम कलयुग में सबसे पवित्र पौधों में गिनी जाओगी।
तुम भगवान विष्णु की सबसे प्रिय बनोगी और भक्तों को मोक्ष दोगी।
लेकिन, तुम्हारे द्वारा दिए गए श्राप के कारण मेरी पूजा में कभी तुलसी का इस्तेमाल नहीं होगा।
इसलिए, आज भी गणेश जी की पूजा में मोदक और लाल फूल के साथ मुख्य रूप से दूर्वा (घास) चढ़ाई जाती है, लेकिन तुलसी नहीं।

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