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महिलाओं की आवाज को न्याय की ताकत देने की जिम्मेदारी… कौन हैं डॉ. ममता साहू, जिन्होंने संभाली छत्तीसगढ़ महिला आयोग की कमान?

Woman Express
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रायपुर। छत्तीसगढ़ में महिलाओं के अधिकार, सम्मान और न्याय से जुड़े मामलों को लेकर राज्य महिला आयोग की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है। अब इस संवैधानिक संस्था की कमान डॉ. ममता साहू के हाथों में है। जुलाई 2026 में छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें राज्य महिला आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया और 14 जुलाई को उन्होंने रायपुर स्थित आयोग कार्यालय में औपचारिक रूप से पदभार संभाला।

डॉ. ममता साहू की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब महिलाओं से जुड़े मामलों में केवल शिकायत दर्ज होना पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि पीड़िता तक न्याय की प्रक्रिया को प्रभावी और समयबद्ध तरीके से पहुंचाना बड़ी चुनौती है। घरेलू हिंसा, मानसिक प्रताड़ना, कार्यस्थल पर उत्पीड़न, पारिवारिक विवाद, सम्मान और गरिमा से जुड़े मामलों में महिला आयोग पीड़ित महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण संस्थागत मंच है।

लंबे इंतजार के बाद हुई नियुक्ति

छत्तीसगढ़ सरकार ने जुलाई में निगम, मंडल और आयोगों में नई नियुक्तियों की घोषणा की। इसी सूची में डॉ. ममता साहू को राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। नियुक्ति के बाद उन्होंने 14 जुलाई को आयोग का कार्यभार संभाला।

सरकारी स्तर पर उनकी नई जिम्मेदारी को महिलाओं से जुड़े मामलों में आयोग की सक्रिय भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है। पद संभालने के बाद आयोग की गतिविधियों में जनसुनवाई और महिलाओं से जुड़े मामलों की सुनवाई प्रमुख दिखाई दे रही है।

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कुर्सी संभालते ही सामने आई बड़ी जिम्मेदारी

महिला आयोग की अध्यक्ष के रूप में डॉ. ममता साहू के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन महिलाओं तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना है, जो पारिवारिक या सामाजिक परिस्थितियों के कारण अपनी बात प्रभावी ढंग से सामने नहीं रख पातीं।

आयोग में आने वाली शिकायतें केवल कानूनी विवाद नहीं होतीं। इनके पीछे कई बार घरेलू कलह, पति-पत्नी के विवाद, मानसिक प्रताड़ना, आर्थिक निर्भरता, सामाजिक दबाव और महिलाओं की सुरक्षा जैसे गंभीर सवाल होते हैं।

इसी वजह से महिला आयोग की भूमिका केवल शिकायत सुनने तक सीमित नहीं रहती। शिकायतों की सुनवाई, संबंधित पक्षों को बुलाना, आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों और प्रशासन से समन्वय करना तथा महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना भी आयोग की जिम्मेदारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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जनसुनवाई बनी कार्यशैली की अहम तस्वीर

डॉ. ममता साहू की अध्यक्षता में महिला आयोग की जनसुनवाई भी हुई हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में महिलाओं की प्रताड़ना सहित विभिन्न मामलों पर सुनवाई का उल्लेख मिलता है। इससे यह संकेत मिलता है कि नई अध्यक्ष के कार्यकाल में शिकायतों की सुनवाई को आयोग की प्राथमिक गतिविधियों में प्रमुख स्थान दिया जा रहा है।

महिलाओं के सम्मान और गरिमा से जुड़े मामलों में भी आयोग के समक्ष शिकायतें पहुंच रही हैं। ऐसे मामलों में नियमानुसार उचित कार्रवाई की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

राष्ट्रीय महिला आयोग से समन्वय पर भी जोर
जनसुनवाई बनी कार्यशैली की अहम तस्वीर

डॉ. ममता साहू की अध्यक्षता में महिला आयोग की जनसुनवाई भी हुई हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में महिलाओं की प्रताड़ना सहित विभिन्न मामलों पर सुनवाई का उल्लेख मिलता है। इससे यह संकेत मिलता है कि नई अध्यक्ष के कार्यकाल में शिकायतों की सुनवाई को आयोग की प्राथमिक गतिविधियों में प्रमुख स्थान दिया जा रहा है।

महिलाओं के सम्मान और गरिमा से जुड़े मामलों में भी आयोग के समक्ष शिकायतें पहुंच रही हैं। ऐसे मामलों में नियमानुसार उचित कार्रवाई की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

राष्ट्रीय महिला आयोग से समन्वय पर भी जोर
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष की जिम्मेदारी किसी सामान्य प्रशासनिक पद से अलग है। आयोग के सामने आने वाली प्रत्येक शिकायत के पीछे एक महिला की व्यक्तिगत कहानी, परिवार की परिस्थितियां और कई बार उसके भविष्य का सवाल जुड़ा होता है।

ऐसे में अध्यक्ष की भूमिका केवल कानूनी प्रक्रिया की निगरानी तक सीमित नहीं रहती। महिलाओं को यह भरोसा दिलाना भी जरूरी है कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और उनकी शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा।

डॉ. ममता साहू के सामने यही सबसे बड़ी जिम्मेदारी है—महिलाओं के लिए आयोग को ऐसा मंच बनाना, जहां शिकायत लेकर आने वाली महिला खुद को अकेला महसूस न करे।


आगे की राह में कई बड़ी चुनौतियां

छत्तीसगढ़ में महिलाओं से जुड़े मुद्दे काफी व्यापक हैं। शहरों में कार्यस्थल पर सुरक्षा, साइबर अपराध और घरेलू विवाद जैसे विषय महत्वपूर्ण हैं, वहीं ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, आर्थिक निर्भरता और सामाजिक दबाव बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

महिला आयोग के लिए यह जरूरी होगा कि उसकी पहुंच केवल रायपुर तक सीमित न रहे, बल्कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों की महिलाओं तक भी संस्थागत मदद और अधिकारों की जानकारी पहुंचे।

इसी के साथ लंबित मामलों की सुनवाई, शिकायतों की नियमित समीक्षा, प्रशासन और पुलिस के साथ बेहतर समन्वय तथा महिलाओं को कानूनी अधिकारों की जानकारी देना भी आने वाले समय की अहम प्राथमिकताएं हो सकती हैं।
डॉ. ममता साहू के सामने कैसी होगी नई पहचान?

डॉ. ममता साहू का सार्वजनिक परिचय फिलहाल सबसे प्रमुख रूप से छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष के रूप में सामने आया है। उपलब्ध आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोतों में उनके निजी जीवन, शैक्षणिक पृष्ठभूमि और विस्तृत व्यक्तिगत जीवन-वृत्त की पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए उनके बारे में अपुष्ट व्यक्तिगत दावे करना उचित नहीं होगा।

लेकिन एक बात स्पष्ट है—जुलाई 2026 से उन्हें प्रदेश की महिलाओं से जुड़े मामलों की एक महत्वपूर्ण संस्था का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी मिली है।

अब उनकी पहचान इस बात से तय होगी कि महिला आयोग महिलाओं की शिकायतों को कितनी प्रभावी आवाज देता है, पीड़ित महिलाओं को कितना भरोसा मिलता है और न्याय की प्रक्रिया कितनी संवेदनशील तथा समयबद्ध बनती है।

क्योंकि महिला आयोग की कुर्सी केवल एक पद नहीं है—यह उन हजारों महिलाओं की उम्मीदों की जिम्मेदारी है, जो अपनी आवाज को न्याय तक पहुंचाने के लिए किसी मजबूत मंच की तलाश में हैं।

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