बीजापुर। भोपालपटनम नगर पंचायत में भले ही नगरीय निकाय चुनाव की तारीखों और औपचारिक कार्यक्रम की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन चुनावी सरगर्मियां अभी से तेज होने लगी हैं। नगर पंचायत अध्यक्ष पद से ज्यादा इस बार पार्षदों के चुनाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल दिखाई देने लगी है। संभावित प्रत्याशी अपनी जमीन मजबूत करने और समर्थकों को लामबंद करने में जुट गए हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा कांग्रेस के असंतोष और रूठें हुई बड़े कार्यकर्त्ताओ का भी समर्थन की आशंका जताई जा रही है.
सभी 15 वार्डों में समर्थित प्रत्याशी उतारने की तैयारी
इसी बीच वार्ड क्रमांक 10 से युवा पत्रकार चेतन कापेवार का नाम भी चर्चाओं में तेजी से उभर रहा है। नगर में इन दिनों चर्चा है कि, चेतन कापेवार केवल अपने वार्ड तक सीमित रहने के बजाय नगर पंचायत के सभी 15 वार्डों में अपने समर्थित प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारने की रणनीति तैयार कर रहे हैं। राजनीतिक जानकारों के बीच यह भी चर्चा है कि, उनका मुख्य लक्ष्य नगर पंचायत में उपाध्यक्ष पद के लिए मजबूत समर्थन जुटाना हो सकता है। इसके लिए अधिक से अधिक पार्षदों को अपने पक्ष में लाने की रणनीति पर काम किए जाने की बातें सामने आ रही हैं।
भोपालपटनम में बदल सकते हैं चुनावी समीकरण
अगर यह चुनावी रणनीति जमीन पर उतरती है तो भोपालपटनम नगर पंचायत का चुनावी मुकाबला दिलचस्प हो सकता है। क्योंकि अब तक भाजपा और कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबले की चर्चा होती रही है, लेकिन इस बार युवा नेतृत्व और संभावित निर्दलीय समीकरण भी राजनीतिक दलों की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। चेतन कापेवार की पहचान एक युवा पत्रकार के रूप में है। मिलनसार स्वभाव, सामाजिक संपर्क और नगर में अच्छी पकड़ उनकी राजनीतिक संभावनाओं को लेकर चर्चा का विषय बनी हुई है।
भोपालपटनम में निर्दलीय प्रत्याशियों की बढ़ सकती है ताकत
वहीं कापेवार परिवार का भी नगर में अच्छा जनसंपर्क बताया जाता है। ऐसे में उनके द्वारा अलग-अलग वार्डों में प्रत्याशियों को समर्थन देने की संभावित रणनीति को हल्के में नहीं लिया जा रहा है। देश भर मे जेनजी के आक्रोश के बीच उपन्न परिस्थिति मे नगर पंचायत भोपाल पटनम मे भी युवा मतदाता का रुझान निर्दलीय उम्मीदवारों की तरफ ज्यादा नज़र आ रहा है।
चुनावी तारीखों से पहले भोपालपटनम में सियासी हलचल तेज
फिलहाल चुनाव की तारीखों का ऐलान होना बाकी है, लेकिन भोपालपटनम में राजनीतिक बिसात बिछने लगी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि, चेतन कापेवार की यह रणनीति केवल चुनावी चर्चा बनकर रह जाती है या वास्तव में भाजपा और कांग्रेस के सामने तीसरे समीकरण के रूप में उभरती है। आने वाले दिनों में नगर पंचायत की राजनीति में नए चेहरे और नए गठबंधन क्या रंग दिखाते हैं, इस पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।
