अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान राशि के गबन और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय पुलिस को बड़ी राहत मिली है। इस मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने अपनी निगरानी समाप्त कर दी। यूपी पुलिस द्वारा ठोस वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर चार्जशीट दाखिल करने और आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद अदालत ने यह निर्णय लिया।
चोरी की रकम से प्रॉपर्टी खरीदी और बैंक में जमा किए पैसे
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि पुलिस जांच में पूरे मनी ट्रेल का पर्दाफाश हो चुका है। चढ़ावे की चोरी दान पेटियों से पैसे की गिनती के दौरान की गई थी।
आरोपियों ने चोरी किए गए कैश को या तो अपने बैंक खातों में जमा कराया या फिर अचल संपत्तियों में निवेश किया। एक उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि सेल डीड में संपत्ति की कीमत 15 लाख रुपये दर्ज थी जबकि वास्तविक मूल्य 50 लाख रुपये था, जिसका शेष भुगतान इसी नकद राशि से किया गया था। आरोपियों के पास आय का अन्य कोई स्रोत न होने के कारण यह राशि सीधे चोरी से जुड़ी साबित हुई।
45 दिन में ऑटो डिलीट होती थी फुटेज, ऑडिट में सभी भेंट सुरक्षित
सॉलिसिटर जनरल ने तकनीकी पहलुओं की जानकारी देते हुए अदालत को बताया कि मंदिर के सीसीटीवी कैमरों में ऑटो-इरेज तकनीक होने के कारण फुटेज केवल 45 दिनों तक ही सुरक्षित रहती थी।
हालांकि, जांच टीम ने फुटेज के अभाव के बावजूद आरोपियों के बैंक खातों और पिछली तारीखों के वित्तीय लेन-देन की गहन पड़ताल कर ठोस सबूत जुटाए। सरकार ने स्पष्ट किया कि मंदिर ट्रस्ट और प्रशासन द्वारा कराए गए ऑडिट में सभी प्राचीन कलाकृतियां, आभूषण और विशेष भेंट पूरी तरह सुरक्षित पाई गई हैं।
भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था और याचिकाकर्ताओं को ट्रायल कोर्ट में मदद की छूट
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए, जिस पर सॉलिसिटर जनरल ने भरोसा दिलाया कि सुरक्षा और निगरानी के उपाय पहले ही कड़े किए जा चुके हैं।
पीठ ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि चूंकि इस मामले में पब्लिक इंटरेस्ट जुड़ा हुआ है, इसलिए कानून के तहत अपराध के पीड़ित की तरह वे संबंधित ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में जारी ट्रायल प्रक्रिया में सहयोग करने के हकदार होंगे।
चार्जशीट के आधार पर याचिकाएं निस्तारित, मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की स्टेटस रिपोर्ट और चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए मामले का निपटारा कर दिया। पीठ ने निर्देश दिया कि अब न्यायिक मजिस्ट्रेट नियमानुसार आगे की विधिक कार्रवाई पूरी करेंगे। अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट रेखांकित किया कि किसी भी पक्ष के पूर्वाग्रह से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मामले के मुख्य आरोपों के मेरिट्स पर अपनी कोई राय व्यक्त नहीं की है।
