Raipur News: करीब 11 साल पुराने सामान गुम होने के मामले में इंडिगो एयरलाइंस को जिला उपभोक्ता आयोग से बड़ा झटका लगा है। आयोग ने एयरलाइन को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी मानते हुए यात्री को कुल 1 लाख 82 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। आदेश के मुताबिक राशि 20 अगस्त 2026 से 45 दिनों के भीतर अदा करनी होगी। इसके अलावा क्षतिपूर्ति राशि पर अप्रैल 2016 से 6 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा।
शादी के बाद फ्लाइट से लौट रहे थे, एयरलाइन ने रखवाए थे बैग
मामला रायपुर के समता कॉलोनी निवासी आशुतोष जाखोदिया का है। 5 दिसंबर 2015 को शादी के बाद वह दिल्ली से रायपुर की फ्लाइट से लौट रहे थे। आरोप के मुताबिक, दिल्ली एयरपोर्ट पर इंडिगो के कर्मचारियों ने भीड़ और समय की कमी का हवाला देते हुए उनके तीन बैग विमान में नहीं ले जाने का आग्रह किया था। कर्मचारियों ने भरोसा दिलाया था कि सामान अगले दिन रायपुर पहुंचा दिया जाएगा।
रायपुर पहुंचने पर तीनों बैग नहीं मिले। यात्री ने एयरलाइन से संपर्क किया तो पहले सामान जल्द पहुंचने की बात कही गई, लेकिन 18 दिसंबर 2015 को एयरलाइन ने सामान गुम होने की जानकारी दी। इसके बाद 7 जनवरी 2016 को ‘कंडीशन ऑफ कैरिज’ का हवाला देते हुए क्षतिपूर्ति देने से इनकार कर दिया गया।
आयोग ने एयरलाइन की दलील को नहीं माना
मामले की सुनवाई अध्यक्ष ढाकेश्वर प्रसाद शर्मा, सदस्य निरूपमा प्रधान और अनिल कुमार अग्निहोत्री की पीठ ने की। आयोग ने इंडिगो की दलील को खारिज करते हुए कहा कि यात्री ने अपनी इच्छा से सामान नहीं छोड़ा था, बल्कि एयरलाइन कर्मचारियों के आग्रह पर तीनों बैग विमान में नहीं ले जाए गए थे। ऐसे में सामान की सुरक्षा की जिम्मेदारी एयरलाइन की बनती है। आयोग ने यह भी माना कि यात्री के खिलाफ तत्काल शिकायत दर्ज नहीं कराने जैसी शर्त का हवाला देकर एयरलाइन अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।
3.20 लाख का दावा, आयोग ने तय किया 1.50 लाख मुआवजा
यात्री ने तीनों बैग में मौजूद सामान की कुल कीमत करीब 3.20 लाख रुपये बताई थी। हालांकि, पूरी कीमत के पर्याप्त दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध नहीं होने के कारण आयोग ने प्रति बैग 50 हजार रुपये के हिसाब से कुल 1.50 लाख रुपये क्षतिपूर्ति तय की।
इसके साथ ही मानसिक परेशानी के लिए 25 हजार रुपये और वाद व्यय व अधिवक्ता शुल्क के रूप में 7 हजार रुपये देने का आदेश दिया गया है। क्षतिपूर्ति राशि पर 29 अप्रैल 2016 से भुगतान की तारीख तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
11 साल बाद आया फैसला
करीब 11 वर्ष तक चले इस मामले में अब उपभोक्ता आयोग के फैसले के बाद यात्री को राहत मिली है। आयोग के आदेश के मुताबिक इंडिगो को कुल 1.82 लाख रुपये की राशि, ब्याज सहित, निर्धारित अवधि में भुगतान करनी होगी।
