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“वरदान माँगूँगा नहीं, हार नहीं मानूँगा।” ये शब्द हिंदी साहित्य के महान कवि शिवमंगल सिंह ‘सुमन’, जिनकी रचनाओं में हमेशा दिखी देशभक्ति और मानवीय संवेदना

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Last updated: August 9, 2026 4:21 pm
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3 Min Read
suman ji
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नई दिल्ली। हिंदी साहित्य के प्रमुख कवियों में शुमार शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ ने अपनी रचनाओं के माध्यम से देशभक्ति, मानवता, संघर्ष और सामाजिक चेतना को प्रभावशाली स्वर दिया। उनकी कविताओं में जहां राष्ट्रप्रेम की भावना दिखाई देती है, वहीं आम इंसान के जीवन, उसकी पीड़ा और संघर्ष की संवेदनशील अभिव्यक्ति भी देखने को मिलती है। यही वजह है कि हिंदी कविता के क्षेत्र में उनका नाम आज भी सम्मान के साथ लिया जाता है।

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शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ का जन्म 5 अगस्त 1915 को उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के झगरपुर गांव में हुआ था। उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद साहित्य को अपना प्रमुख क्षेत्र बनाया। उनकी साहित्यिक यात्रा का विस्तार कविता से लेकर आलोचना और अन्य विधाओं तक रहा।

उनका पहला कविता-संग्रह ‘हिल्लोल’ वर्ष 1939 में प्रकाशित हुआ। इसके बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण कृतियों की रचना की। उनकी चर्चित रचनाओं में ‘जीवन के गान’, ‘प्रलय-सृजन’, ‘विश्वास बढ़ता ही गया’, ‘मिट्टी की बारात’ और ‘वाणी की व्यथा’ जैसी कृतियां शामिल हैं।

उनकी कविता ‘वरदान मांगूंगा नहीं’ हिंदी साहित्य में विशेष रूप से लोकप्रिय रही है। उनकी रचनाओं में संघर्ष के बीच उम्मीद बनाए रखने और परिस्थितियों के सामने झुकने के बजाय उनका सामना करने का संदेश मिलता है।

साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया। उनकी कृति ‘मिट्टी की बारात’ के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। इसके अलावा उन्हें पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया।

साहित्य के साथ-साथ शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ ने शिक्षा और सार्वजनिक जीवन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलपति भी रहे। उन्होंने हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

27 नवंबर 2002 को उनका निधन हुआ। हालांकि उनके निधन को वर्षों बीत चुके हैं, लेकिन उनकी कविताएं आज भी हिंदी पाठकों के बीच लोकप्रिय हैं। उनकी रचनाएं नई पीढ़ी को साहित्य के साथ-साथ संघर्ष, आत्मसम्मान, देशप्रेम और मानवीय मूल्यों का संदेश देती हैं।

शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ का साहित्य इस बात का प्रमाण है कि एक संवेदनशील कवि अपने शब्दों के माध्यम से समाज और आने वाली पीढ़ियों पर लंबे समय तक प्रभाव छोड़ सकता है।

प्रमुख जानकारी :
.जन्म: 5 अगस्त 1916
.निधन: 27 नवंबर 2002
.वे हिंदी के प्रमुख कवि और लेखक थे।
.उनका पहला कविता-संग्रह ‘हिल्लोल’ 1939 में प्रकाशित हुआ था।
‘मिट्टी की बारात’ के लिए उन्हें 1974 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
वर्ष 1999 में उन्हें साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

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