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महादेव सट्टा ऐप घोटाले में बड़ा मोड़, मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर की ओमान से भारत वापसी

Woman Express
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CG Mahadev Satta App Ghotala: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित महादेव सट्टा ऐप मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है. ऐप के मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को भारत लाया गया है. CBI ने ओमान से उसका प्रत्यर्पण कराया है. ओमान पुलिस ने इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर सौरभ को हिरासत मेंलिया था. इसके बाद एजेंसी की टीम ओमान गई. सीबीआई कानूनी प्रक्रिया पूर करके उसे वापस भारत लेकर आई है.

विशेष CBI कोर्ट में पेश किया जाएगा
बता दें, आज सौरभ को रायपुर के विशेष CBI कोर्ट में पेश किया जाएगा. जिसके बाद मामले को लेकर बड़ा फैसला सामने आ सकता है. CBI ने इस मामले में दो केस दर्ज किए हैं और दोनों में चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है. वहीं ED भी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है.

कौन है सौरभ चंद्राकर?

  • महादेव सट्टा ऐप मामले का मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला है.
  • सौरभ की एक जूस की दुकान भी थी. इससे पहले वह कपड़े की दुकान में काम करता था.
  • 2019 में वो दुबई गया और अपने एक दोस्त रवि उत्पल को भी बुलाया. इसके बाद उसने महादेव एप लांच किया और फिर धीरे-धीरे ऑनलाइन सट्टा बाजार का बड़ा नाम बन गया.
  • महादेव सट्टा ऐप के नाम पर करीब 6000 करोड़ रुपये का अवैध कारोबार किया गया.

यह है पूरा मामला
महादेव ऐप घोटाले का मामला काफी पहले से विवादों में रहा है. छत्तीसगढ़ के सौरभ चंद्राकर ने अपने दो साथियों रवि उप्पल और अतुल अग्रवाल के साथ मिलकर 2016 में इसकी शुरुआत की थी. शुरू में इसे महादेव बुक के नाम से शुरू किया गया था.

इस प्लेटफॉर्म पर क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस, बैडमिंटन जैसे खेलों के साथ पोकर, तीन पत्ती और वर्चुअल गेम्स पर ऑनलाइन सट्टा खिलाया जाता था. यहां तक कि चुनाव के नतीजों पर भी सट्टा लगाया जाता था. कुछ ही समय में इसका नेटवर्क तेजी से फैल गया. बताया जाता है कि 2020 में सौरभ और उसके पार्टनर्स ने हैदराबाद के बड़े सट्टा प्लेटफॉर्म रेड्डी अन्ना को करीब 1000 करोड़ रुपये में टेकओवर कर लिया था.

इस डील के बाद महादेव ऐप के यूजर्स की संख्या कई गुना बढ़ गई और इसका सालाना टर्नओवर हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच गयाय.कारोबार बढ़ने के साथ ही यह ऐप जांच एजेंसियों की नजर में आ गया. साल 2022 में इनकम टैक्स और ईडी ने इस पूरे सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई शुरू की. जांच में 6000 करोड़ रुपये से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा होने का दावा किया गया. फिलहाल इस मामले में CBI और ED दोनों अलग-अलग एंगल से जांच कर रही हैं.

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