सारंगढ़। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत संचालित स्व-सहायता समूहों और संकुल स्तरीय संगठनों (CLF) की गतिविधियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जिला पंचायत प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। वित्तीय लेनदेन, ऋण वितरण और बैठकों की प्रक्रिया में अनियमितताओं की आशंका को देखते हुए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ऋषिकेश तिवारी ने जिले के सभी पीआरपी और संकुल संगठनों के लिए 12 सूत्रीय दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
वित्तीय लेनदेन में अब नकद भुगतान पर रोक
जिला पंचायत की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, CLF, VO और SHG में होने वाले सभी प्रकार के वित्तीय लेनदेन को कैशलेस करना अनिवार्य होगा। इसमें राशि का आहरण, निकासी, व्यय, स्थानांतरण और प्राप्तियां शामिल हैं। सभी भुगतान बैंक खाते और बैठक में पारित प्रस्तावों के आधार पर ही किए जाएंगे। नकद भुगतान पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। इसके लिए NEFT, RTGS, IMPS, UPI या अन्य अधिकृत डिजिटल माध्यमों का उपयोग करना होगा।

CLF की बैठकों में पीआरपी का हस्तक्षेप नहीं होगा स्वीकार
जारी आदेश में सबसे महत्वपूर्ण निर्देश संकुल स्तरीय संगठनों (CLF) की बैठकों को लेकर दिया गया है। CLF की कार्यकारिणी समिति की बैठक में CIF या उद्यमी ऋण देने से संबंधित निर्णय प्रस्ताव के आधार पर संबंधित पदाधिकारी ही लेंगे। इस निर्णय प्रक्रिया में पीआरपी (प्रेरक संसाधन व्यक्ति) का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। पीआरपी की भूमिका पदाधिकारियों को बिहान योजना के नियमों की जानकारी देने और उन्हें प्रोत्साहित करने तक सीमित रहेगी। यानी पीआरपी मार्गदर्शन तो कर सकेंगे, लेकिन ऋण वितरण से जुड़े फैसलों को प्रभावित नहीं कर सकेंगे।
ऋण वितरण और मानदेय का भुगतान भी होगा डिजिटल
जिला पंचायत के निर्देश के मुताबिक, CLF से ग्राम संगठनों को दिए जाने वाले CIF, उद्यमी ऋण और अन्य ऋणों की स्वीकृति बैठक में पारित प्रस्ताव, जांच और प्राथमिकता के आधार पर होगी। स्वीकृत राशि सीधे संबंधित समूह या सदस्य के बैंक खाते में भेजी जाएगी। इसके अलावा कैडर मानदेय, VPRP मानदेय, लखपति दीदी, लोकोस और अन्य मानदेय का भुगतान भी डिजिटल माध्यमों से संबंधित हितग्राहियों के बैंक खातों में करना अनिवार्य किया गया है। किसी भी परिस्थिति में नकद भुगतान की अनुमति नहीं होगी।
ब्याज निकालने से पहले DMMU की अनुमति जरूरी
CLF के खाते में जमा ब्याज की राशि का आहरण, निकासी, व्यय या स्थानांतरण करने से पहले जिला मिशन प्रबंधन इकाई (DMMU) से लिखित अनुमोदन लेना होगा। वहीं, संकुल संगठनों के सभी दस्तावेजों और अभिलेखों का संधारण पदाधिकारियों की स्वीकृति के बाद लेखापाल के माध्यम से किया जाएगा। बैठकों में पारित प्रस्तावों का पूरा लेखा-जोखा लिखित रूप में रखना अनिवार्य होगा। अभिलेखों के संधारण में शीशा-पेंसिल के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई है।


हर महीने बैठक और उपस्थिति का देना होगा हिसाब
जिला पंचायत ने सभी पीआरपी को प्रतिमाह CLF की बैठक आयोजित कराने और ग्राम संगठनों एवं पदाधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। बैठक का उपस्थिति पत्रक, कार्यवाही विवरण और पारित प्रस्तावों की छायाप्रति संबंधित जनपद पंचायत से हस्ताक्षरित सहपत्र के साथ जिला मिशन प्रबंधन इकाई तक पहुंचानी होगी। इसके अलावा कटऑफ और रेगुलर एंट्री की प्रक्रिया पर भी निगरानी रखनी होगी। प्रत्येक महीने की 5 तारीख तक सभी जरूरी प्रविष्टियां पूरी कराना पीआरपी की जिम्मेदारी होगी।
निर्देशों की अनदेखी पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ऋषिकेश तिवारी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जारी 12 सूत्रीय दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने वाले संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधितों की होगी। जिला पंचायत प्रशासन के इस आदेश का उद्देश्य बिहान योजना के तहत संचालित स्व-सहायता समूहों और संकुल संगठनों की वित्तीय गतिविधियों में पारदर्शिता बनाए रखना, निर्णय प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप संचालित करना और जवाबदेही तय करना है।
