भोपाल: मध्य प्रदेश के कुनो लैंडस्केप से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। 19 महीने के नर चीते KNG22 की इलाज के दौरान मौत हो गई। पोस्टमार्टम और सर्जरी के दौरान उसके शरीर से पांच छर्रे (पैलेट्स) बरामद हुए, जिससे गोली लगने की पुष्टि हुई। इस घटना के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को लगाया है।
वन विभाग के मुताबिक KNG22, मादा चीता निरवा का शावक था। उसे रविवार शाम मुरैना जिले के पहाड़गढ़ रेंज के जंगल में गंभीर रूप से घायल हालत में मॉनिटरिंग टीम ने देखा था। प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए जबलपुर ले जाया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद मंगलवार को उसकी मौत हो गई।
शरीर से निकले पांच छर्रे
मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक समीता राजौरा ने बताया कि सीटी स्कैन में शरीर के भीतर विदेशी धातु जैसी वस्तुएं दिखाई दीं। ऑपरेशन के दौरान पांच छर्रे निकाले गए। इनसे चीते के आंतरिक अंगों, मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा था।
पहली बार गोली से चीते की मौत
यह घटना इसलिए भी अहम है क्योंकि 2022 में प्रोजेक्ट चीता शुरू होने के बाद देश में पहली बार किसी चीते की गोली लगने से मौत की पुष्टि हुई है। शुरुआती जांच में वन्यजीव अपराध और मानव-वन्यजीव संघर्ष दोनों पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
STF करेगी जांच
घटना कुनो राष्ट्रीय उद्यान के बाहर मुरैना टेरिटोरियल फॉरेस्ट क्षेत्र में हुई। इसी वजह से वन विभाग और पुलिस की संयुक्त STF पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि गोली किस हथियार से चलाई गई, इसके पीछे शिकार का उद्देश्य था या कोई अन्य वजह।
कुनो से बाहर बढ़ी सुरक्षा की चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि रेडियो कॉलर से चीते की लोकेशन का पता चल जाता है, लेकिन जब वे संरक्षित क्षेत्र से निकलकर आसपास के जंगलों और गांवों की ओर जाते हैं तो उनकी सुरक्षा बड़ी चुनौती बन जाती है। KNG22 की मौत ने मुक्त विचरण करने वाले चीतों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
KNG22 की मौत के बाद देश में चीतों की कुल संख्या घटकर 58 रह गई है। इनमें 52 कुनो राष्ट्रीय उद्यान, 4 गांधी सागर अभयारण्य और 2 वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में हैं।
