शहडोल। वर्दी में लापरवाही और संदिग्ध आचरण पर सख्ती, तो दूसरी ओर पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, शहडोल में पुलिस अधीक्षक डॉ. संजय कुमार अग्रवाल ने महज दो दिनों के भीतर ऐसे कदम उठाए हैं, जिनसे पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है। पहले सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और विभागीय प्रतिवेदन के आधार पर दो पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया, फिर उपनिरीक्षक से लेकर आरक्षक स्तर तक के 29 पुलिसकर्मियों के तबादले कर दिए गए, साथ ही, नई पदस्थापना पर तीन दिन के भीतर ज्वाइनिंग के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
वायरल वीडियो के बाद दो पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक ने संदिग्ध आचरण के मामलों को गंभीरता से लेते हुए सोहागपुर थाने में पदस्थ सहायक उपनिरीक्षक जवाहरलाल राय और प्रधान आरक्षक क्रमांक 185 चेतराम कौशिक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। दोनों को निलंबन अवधि में थाना ब्यौहारी से संबद्ध किया गया है। तो वही एएसआई जवाहरलाल राय के संदिग्ध आचरण से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ था। वहीं, प्रधान आरक्षक चेतराम कौशिक के खिलाफ बुढ़ार थाना प्रभारी की रिपोर्ट में वारंटी की तलाश के लिए रवानगी दर्ज कराने के बावजूद तलाश नहीं करने और विवेचना से संबंधित आवश्यक रिपोर्ट दर्ज नहीं करने जैसी लापरवाही का उल्लेख किया गया है। उनके संदिग्ध आचरण से जुड़ा वीडियो भी सामने आया था।
अब 29 पुलिसकर्मियों के तबादले
निलंबन की कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में प्रशासनिक फेरबदल करते हुए एसपी ने 29 पुलिसकर्मियों के अस्थायी तबादले के आदेश जारी किए हैं। इसमें उपनिरीक्षक, सहायक उपनिरीक्षक, प्रधान आरक्षक और आरक्षक स्तर के कर्मचारी शामिल हैं।
आदेश के तहत उपनिरीक्षक मोतीलाल सोनवानी को कोतवाली से देवलोंद भेजा गया है। प्रधान आरक्षक स्तर पर कई कर्मचारियों को ब्यौहारी, सोहागपुर, अमलाई और जयसिंहनगर सहित विभिन्न थानों में पदस्थ किया गया है। वहीं, आरक्षक स्तर पर भी थाना और यातायात व्यवस्था के अनुसार बदलाव किए गए हैं।
तीन दिन में ज्वाइनिंग अनिवार्य
एसपी ने संबंधित थाना प्रभारियों और रक्षित निरीक्षक को निर्देश दिए हैं कि स्थानांतरित पुलिसकर्मियों को तीन दिन के भीतर कार्यमुक्त कर नई पदस्थापना पर रवाना किया जाए, निर्धारित समय में ज्वाइन नहीं करने पर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।लगातार दो दिनों में हुई इन कार्रवाइयों को पुलिस महकमे में अनुशासन, जवाबदेही और प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में उठाए गए कदम के रूप में देखा जा रहा है।
