नई दिल्ली। दिल्ली में चल रही BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप के बीच महिला खिलाड़ियों ने खेल के दौरान पीरियड्स से जुड़ी परेशानियों को लेकर एक अहम मुद्दा उठाया है। खिलाड़ियों का कहना है कि महिलाओं की शारीरिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बैडमिंटन के मौजूदा नियमों में अधिक लचीलापन होना चाहिए।
डेनमार्क की शटलर मिया ब्लिचफेल्ट की पहल पर बने Women’s Badminton Collective के जरिए यह मुद्दा सामने आया। चीन की ओलंपिक चैंपियन हुआंग डोंग पिंग ने भी कहा कि महिला खिलाड़ियों के लिए पीरियड्स के दौरान मैच खेलना कई बार चुनौतीपूर्ण हो सकता है और ब्रेक से जुड़े नियमों में बदलाव की जरूरत है।

अभी क्या हैं नियम?
बैडमिंटन में फिलहाल पीरियड्स के लिए अलग से टॉयलेट ब्रेक का प्रावधान नहीं है। खिलाड़ी 11 अंक के ब्रेक में 60 सेकंड या गेम के बाद मिलने वाले ब्रेक में ही वॉशरूम जाने की अनुमति मांग सकती हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि ऐसी स्थिति में नियमों में थोड़ी मानवीय संवेदनशीलता जरूरी है।
दिल्ली में आयोजकों ने उठाया अहम कदम
महिला खिलाड़ियों की परेशानी को देखते हुए दिल्ली वर्ल्ड चैंपियनशिप के आयोजकों ने महिला वॉशरूम में सैनिटरी पैड खुले तौर पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। यह सुविधा खिलाड़ियों के साथ-साथ महिला अधिकारियों, लाइन जजों और दर्शकों के लिए भी रखी गई है। आयोजकों का उद्देश्य पीरियड्स को लेकर झिझक और शर्म की भावना को कम करना है।
महिला खिलाड़ियों की यह मांग सिर्फ बैडमिंटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि क्या खेलों के नियम महिलाओं की वास्तविक शारीरिक जरूरतों को पर्याप्त रूप से ध्यान में रखते हैं?
