असम में बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की दिशा में राज्य सरकार ने अपने प्रशासनिक तंत्र से कड़े सुधारों की शुरुआत कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में राज्य के सरकारी कर्मचारियों के सेवा आचरण से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया गया।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया और प्रेस वार्ता के माध्यम से साफ कर दिया कि शासन में पारदर्शिता, अनुशासन और महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए बहुविवाह करने वाले किसी भी कर्मचारी को सेवा में बने रहने का अधिकार नहीं होगा।
असम सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम 1964 में संशोधन को मंजूरी
कैबिनेट ने इस कड़े फैसले को कानूनी रूप देने के लिए असम सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1964 में संशोधन के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी है। नए संशोधित प्रावधानों के अनुसार, यदि राज्य सरकार का कोई भी मौजूदा कर्मचारी सेवा के दौरान पहली पत्नी/पति के जीवित रहते हुए दूसरी शादी करता है या बहुविवाह का दोषी पाया जाता है, तो उसे विभागीय जांच के बाद तत्काल प्रभाव से पद से बर्खास्त कर दिया जाएगा। साथ ही, भविष्य में सरकारी सेवा में प्रवेश के लिए भी उसे हमेशा के लिए अपात्र घोषित कर दिया जाएगा।
हिंदू, मुस्लिम और ईसाई समेत सभी समुदायों पर एक समान लागू होगा नियम
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया कि यह नियम किसी विशेष वर्ग के लिए नहीं, बल्कि सर्वसमावेशी है। उन्होंने कहा कि राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) के बुनियादी सिद्धांतों के अनुरूप यह आदेश हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और अन्य सभी धार्मिक समुदायों के सरकारी कर्मचारियों पर बिना किसी भेदभाव के समान रूप से लागू होगा।
सरकार का मानना है कि सरकारी सेवा में कार्यरत व्यक्तियों को समाज के सामने एक आदर्श आचरण प्रस्तुत करना चाहिए, इसलिए निजी कानूनों की आड़ लेकर बहुविवाह करने की छूट कर्मचारियों को नहीं दी जाएगी।
बजट में हुई थी घोषणा, कल्याणकारी योजनाओं से भी किया जाएगा बेदखल
उल्लेखनीय है कि इस कड़े कदम की रूपरेखा जुलाई में राज्य के बजट सत्र के दौरान रखी गई थी। उस समय राज्य के वित्त मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने सदन में कहा था कि महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने और लैंगिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए सरकार कठोर नीतियां बना रही है।
बजट प्रस्ताव के तहत यह भी तय किया गया था कि एक से अधिक शादियां करने वाला कोई भी पुरुष राज्य सरकार की किसी भी सामाजिक कल्याणकारी योजना का लाभार्थी बनने का पात्र नहीं रहेगा। अब कैबिनेट द्वारा सेवा नियमों में संशोधन की मंजूरी दिए जाने के बाद इसे पूरी तरह लागू कर दिया गया है।
