Tejashwi Targets Samrat Choudhary: बिहार इन दिनों देशभर में अलग ही वजह से चर्चा में बना हुआ है. यहां पिछले एक हफ्ते के दौरान 3 वीडियो सामने आए हैं. जिसके बाद पुलिस के साथ-साथ प्रशासन पर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं. जमुई में हुई घटना के बाद पुलिस ने लोगों से अपील की थी कि पीड़िता की पहचान उजागर न करें. अगर ऐसा करते हैं तो POSCO एक्ट के तहत कार्रवाई हो सकती है. लेकिन, अब इसी तरह की गलती खुद सूबे के सीएम सम्राट चौधरी ने कर दी है.
दरअसल जमुई पीड़िता और उसके परिवार से बीते दिन सीएम सम्राट चौधरी ने लोकभवन में मुलाकात की थी. इस दौरान कार्रवाई से लेकर पूरी घटना के बारे में सीएम ने उनसे बात की. लेकिन इसी मुलाकात के दौरान सीएम सम्राट ने परिवार के और पीड़िता के साथ एक तस्वीर खिंचवाई, जिसे उनकी टीम ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर शेयर कर दिया.
सीएम के सोशल मीडिया पर जैसे ही तस्वीर सामने आई तो पुलिस की अपील पर भी सवाल खड़े होने लगे. दूसरी तरफ विपक्ष भी सरकार पर हमलावर हो गया. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पुलिस से सीएम सम्राट पर OSCO एक्ट के तहत कार्रवाई करने की मांग कर दी.
सीएम ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में क्या लिखा?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि लोक सेवक आवास पर जमुई की पीड़ित बच्ची और उसके परिवार से मुलाकात की. मुख्यमंत्री ने बच्ची को निर्भय होकर आगे बढ़ने और परिवार को जल्द न्याय का भरोसा दिया. उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई से परिवार संतुष्ट है और सभी दोषियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल के जरिए एक महीने के भीतर कठोर सजा सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी.
तेजस्वी यादव ने बोला सीएम सम्राट पर हमला
तेजस्वी यादव ने सीएम सम्राट पर हमला बोलते हुए उनकी सोशल मीडिया पोस्ट को शेयर किया. इसी के साथ उन्होंने लिखा कि नासमझ, अनाड़ी, कानून विरोधी बिहार के मुख्यमंत्री ख़ुद पॉक्सो एक्ट की धज्जियां उड़ा रहे है. जमुई कांड की नाबालिग पीड़िता की परिजनों संग अपने सोशल मीडिया हैंडल से तस्वीर जारी कर पीड़िता की पहचान उजागर कर रहे है.
आगे लिखा कि पॉक्सो एक्ट (POCSO Act, 2012) के तहत पीड़ित बच्चे या नाबालिग की पहचान को गुप्त रखना कानूनन अनिवार्य है और इसे सार्वजनिक करना गंभीर अपराध है.
तेजस्वी यादव ने बताया कानून
तेजस्वी ने कहा कि पोक्सो अधिनियम-2012 की धारा 23 के अनुसार, किसी भी मीडिया प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या सोशल मीडिया) या अन्य माध्यम से पीड़ित बच्चे की पहचान उजागर नहीं की जा सकती. इसमें बच्चे का नाम, पता, फोटो, स्कूल या परिवार से जुड़ी कोई भी जानकारी शामिल है. जिससे उसकी पहचान का खुलासा हो सके। पहचान उजागर करने पर 6 महीने से 1 साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं.
बिहार के मुख्यमंत्री को इस जुर्म के लिए कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए अन्यथा फिर पॉक्सो एक्ट को मानेगा कौन? सातवीं फेल सात हत्याओं का आरोपी मुख्यमंत्री बनाने पर ऐसे ही कानून का उल्लंघन होते रहेगा. ऐसे लोग कानून के रक्षक नहीं भक्षक है.
तेजस्वी के इस हमले के कुछ देर बाद ही सीएम सम्राट के सोशल मीडिया पेज से जमुई पीड़िता के साथ हुई मुलाकात की पोस्ट को हटा दिया गया. अब देखना होगा कि आगे तस्वीर शेयर करने के मामले में किस पर कार्रवाई की जाती है.
