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MADHYA PRADESH

Balaghat Tiger Attack: बाघों के खौफ में बालाघाट के गांव! 6 महीने में 6 मौतें, 2 घायल; विधायक मधु भगत ने CM मोहन यादव से मांगी सुरक्षा

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Last updated: September 1, 2026 2:00 pm
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Balaghat Tiger Attack
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Balaghat Tiger Attack: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में जंगल से लगे गांवों में बाघों की बढ़ती आवाजाही ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। गांवों के करीब बाघों की मौजूदगी और लगातार सामने आ रहे हमलों ने मानव-बाघ संघर्ष को गंभीर बना दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले छह महीनों में बाघों ने 8 लोगों पर हमला किया, जिसमें 6 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

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ज्यादातर घटनाएं जंगल से लगे ग्रामीण इलाकों और कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में सामने आई हैं। लगातार हो रही घटनाओं के बाद अब ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और मानव-बाघ संघर्ष को रोकने के लिए दीर्घकालिक रणनीति की मांग उठ रही है।

अगस्त में लगातार सामने आईं बाघ के हमले की घटनाएं
बालाघाट में अगस्त 2026 के दौरान मानव-बाघ संघर्ष की कई घटनाएं सामने आईं। 2 अगस्त की रात कान्हा बफर क्षेत्र के पर्रापुर गांव में बाघ एक घर में घुस गया और एक महिला पर हमला कर उसकी जान ले ली।

इसके बाद 7 अगस्त को मालखेड़ी क्षेत्र में कृषक युवक राजकुमार परते पर बाघ ने हमला कर दिया। वहीं, 9 अगस्त को खैरलांजी परिक्षेत्र के पांडरवानी-सतीटोला क्षेत्र में भी बाघ के हमले की घटना सामने आई, जिसमें एक कृषक की मौत हो गई। इस घटना में तीन मवेशियों के भी मारे जाने की जानकारी सामने आई।

जंगल से लगे गांवों में बढ़ी दहशत
18 अगस्त को कान्हा बफर जोन के करेली गांव निवासी संतोष मेश्राम पर बाघ ने अचानक हमला कर दिया। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के बाद जंगल से सटे गांवों में डर का माहौल है।

बताया जा रहा है कि कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर जोन से लगे करीब 21 गांव जंगल की सीमा के आसपास हैं। क्षेत्र में करीब 28 बाघों की मौजूदगी बताई जा रही है। ऐसे में ग्रामीणों और वन्यजीवों के बीच बढ़ता संपर्क चिंता का विषय बन गया है। मार्च 2026 से अब तक सामने आए आंकड़ों के अनुसार, बाघों के हमलों में 6 लोगों की जान जा चुकी है और 2 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

विधायक मधु भगत ने CM मोहन यादव से की मुलाकात
बढ़ते मानव-बाघ संघर्ष को लेकर कांग्रेस विधायक मधु भगत ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात कर प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।

बालाघाट दौरे के दौरान मुख्यमंत्री से चर्चा में विधायक ने जंगल से लगे गांवों के आसपास मजबूत सुरक्षा बाड़, पर्याप्त रोशनी, लगातार पेट्रोलिंग और रियल-टाइम ट्रैकिंग सिस्टम विकसित करने की जरूरत बताई। उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों को बाघों की मौजूदगी और आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशिक्षित करने की मांग भी रखी।

बाघों के लिए जंगल में पानी और शिकार की व्यवस्था की मांग
विधायक ने मानव-बाघ संघर्ष को कम करने के लिए जंगल के भीतर बाघों के लिए पर्याप्त पानी और प्राकृतिक शिकार की उपलब्धता सुनिश्चित करने की भी मांग की है। विशेषज्ञों के मुताबिक, जब जंगली जानवर भोजन और पानी की तलाश में जंगल से बाहर निकलते हैं, तो मानव आबादी के करीब आने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में केवल हमले के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से ऐसी व्यवस्था तैयार करने की जरूरत है, जिससे बाघों की गांवों की ओर आवाजाही कम हो सके।

अब तात्कालिक कार्रवाई नहीं, स्थायी समाधान की जरूरत
बालाघाट में लगातार सामने आ रही घटनाओं ने मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष की गंभीरता को सामने ला दिया है। ग्रामीणों की सुरक्षा के साथ बाघों के संरक्षण के बीच संतुलन बनाना अब सबसे बड़ी चुनौती है।

प्रभावित गांवों में निगरानी, पेट्रोलिंग और ट्रैकिंग सिस्टम मजबूत करने के साथ-साथ जंगल के भीतर भोजन-पानी की पर्याप्त व्यवस्था करना जरूरी माना जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अब केवल हमले के बाद राहत या मुआवजे से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि मानव-बाघ संघर्ष को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था और जिम्मेदार प्रशासनिक कार्रवाई की जरूरत है।

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