Chhattisgarh Government: छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय क्षेत्रों में पार्षद पति की व्यवस्था पर रोक लगा दी गई है। राज्य सरकार ने इस संबंध में सोमवार को अधिसूचना जारी कर दी है। चुनाव जीतने वाली महिला को फील्ड में काम करना होगा।

छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में अब महिला जनप्रतिनिधियों की जगह उनके पति या दूसरे रिश्तेदार काम नहीं कर सकेंगे। सरकार ने साफ कर दिया है कि जिस महिला को जनता ने चुनाव में चुना है, अपने पद की जिम्मेदारी भी वही निभाएगी। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने नियमों में बदलाव करते हुए इसकी अधिसूचना राजपत्र में जारी कर दी है। नए नियम के मुताबिक महिला जनप्रतिनिधि अपने पति, बेटे, बेटी, भाई, बहन या किसी अन्य करीबी रिश्तेदार को अपना प्रतिनिधि या समन्वयक नियुक्त नहीं कर सकेंगी।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
सरकार का कहना है कि इस फैसले का मुख्य मकसद महिलाओं को वास्तव में सशक्त बनाना है। महिलाओं को राजनीति में आगे लाने के लिए आरक्षण दिया गया है, लेकिन कई जगहों पर यह देखने को मिला कि निर्वाचित महिला पार्षद की जगह उनके पति या परिवार के दूसरे सदस्य सरकारी कामकाज में दखल दे रहे थे। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने बताया कि विभाग को ऐसी कई शिकायतें मिली थीं। शिकायतों में कहा गया था कि महिला पार्षदों के बजाय उनके परिजन कार्यालयों में जाकर कामकाज संभालते हैं। इसके बाद सरकार ने नियमों में बदलाव करने का फैसला लिया।
